नई दिल्ली | पीछले साल 8 नवम्बर को प्रधानमंत्री मोदी ने नोट बंदी की घोषणा की थी. उस समय उन्होंने जनता को बताया था की आप 31 दिसम्बर तक अपने पुराने नोट बैंक जाकर बदल सकते है. जो लोग किन्ही कारण से अपने नोट इस समय अवधि तक नही बदल पाए वो 31 मार्च तक आरबीआई की किसी भी शाखा में जाकर पैसे बदल सकते है. लेकिन ऐसा नही हुआ.

आरबीआई और वित्त मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिया की 31 दिसम्बर के बाद केवल एनआरआई लोगो का पैसा आरबीआई की शाखाओ में बदला जायेगा. सरकार के इस फैसले से बहुत सारे ऐसे लोग बर्बाद हो गए जो एक वाजिब कारण से उस समय अवधि के दौरान पुराने नोट नही बदल सके. इसलिए काफी लोगो ने सुप्रीम कोर्ट से उनके नोट बदलवाने की गुहार लगाई हुई है.

कुछ इसी तरह का एक बेहद ही अजीबो गरीब मामला सुप्रीम कोर्ट के पास आया है. दरअसल आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग केस में श्रीसंत के साथ उनके दोष अभिषेक शुक्ला भी गिरफ्तार किये गए थे. गिरफ़्तारी के समय अभिषेक के पास करीब साढ़े पांच लाख रूपए मौजूद थे जो पुलिस ने जब्त कर लिए थे. अब चूँकि पटियाला हाउस कोर्ट ने अभिषेक शुक्ला को दोषमुक्त कर दिया है तो जब्त किये गए सारे पैसे उसको वापिस देने का अधिकार है.

इसलिए अभिषेक ने पुलिस ने सभी रूपए वापिस मांगे. पुलिस ने भी अपना फर्ज निभाते हुए उसको पैसे लौटा दिए. लेकिन ये सभी नोट बंद हो चुके नोट के रूप में थे. अभिषेक इन सभी पैसो को लेकर आरबीआई पहुंचे और उन्हें अपनी आप बीती बतायी. लेकिन आरबीआई ने नोट बदलने से इनकार कर दिया. मजबूरन अभिषेक को सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा. इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस जेएस खेहर ने अभिषेक के वकील से कहा की वो पुलिस की सीजर मेमो लेकर कोर्ट आएं और ये भी बताएं कि ये जब्त नोट कितने-कितने के थे?

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