कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कर्णन (रिटायर्ड) ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर मौजूदा चीफ जस्टिस समेत कुल आठ जजों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट का उल्लंघन करने के मामले में उनके द्वारा सुनाई गई सज़ा पर कोई कार्रवाई नहीं होने की शिकायत की है। इतना ही नहीं इस मामले को उन्होने इंटरनेशनल कोर्ट के समक्ष उठाने की बात कहीं।

जस्टिस कर्णन ने लिखा है कि अब वो इस मामले को हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के सामने उठाने जा रहे हैं क्योंकि अभी तक उन्हें इस मामले में न तो न्याय मिल सका है और न ही उस पर कोई कार्रवाई हुई है। बतौर जस्टिस कर्णन उन्हें भारत में इस मामले में इंसाफ मिलने की उम्मीद नहीं है।

उन्होंने लिखा है, ‘मैं 8 दोषी/आरोपी/असामाजिक तत्व/आतंकी जजों के खिलाफ पूर्व में जज रहने के दौरान आदेश पास कर चुका हूं। लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं गई। इन आठ जजों में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस खेहर, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा, पूर्व जस्टिस चेम्लेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लुकुर, जस्टिस पीसी घोष जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस आर भानुमति हैं।’ इन पर उन्होंने दलित उत्पीड़न से लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

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यह पहला मौका नहीं है, जब जस्टिस कर्णन अपने किसी काम के लिए सुर्खियों में हैं। वह जजों पर आरोप को लेकर अदालत की अवमानना में जेल भी काट चुके हैं।  जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस एम बी लोकुर, जस्टिस पी सी घोष, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस भानुमति को करप्ट, एंटी सोशल एलिमेंट और टेररिस्ट कहते हुए दोषी ठहराया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए 9 मई 2017 को उन्हें कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी।

इससे पहले पिछले साल जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट के 20 सीटिंग जजों को करप्ट बताते हुए उनकी शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक खत के जरिए की थी। जस्टिस कर्णन ने आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में अपनी पार्टी के साथ कूदने का ऐलान किया हुआ है। उन्होंने कहा कि एंटी करप्‍शन डायनमिक पार्टी का गठन करेंगे और चुनाव लड़ेंगे।

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