नई दिल्ली | म्यांमार में हो रही हिंसा से अपनी जान बचाकर भारत आने वाले हजारो रोहिंग्या मुस्लिम शर्णार्थियो के भविष्य पर कई प्रशन चिन्ह लगे हुए है. मोदी सरकार इन शर्णार्थियो को भारत में शरण देना नही चाहती वही म्यांमार में उनके जीवित रहने की कोई गारंटी नही है. ऐसे में कई मानवाधिकारो संगठन, संयुत राष्ट्र और देश के विपक्षी दलों ने मोदी सरकार से आग्रह किया है की वो इन शरणार्थियो को वापिस म्यांमार न भेजे.

लेकिन मोदी सरकार का कहना है की ये लोग शरणार्थी न होकर अवैध प्रवासी है और गलत तरीके से भारत में घुसे है. इसके अलावा सरकार ने इन्हें राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भी खतरा बताया है. लेकिन अब बीजेपी में ही सरकार के इस फैसले के खिलाफ असंतोष उठने लगा है. बीजेपी सांसद वरुण गाँधी ने रोहिंग्या मुस्लिमो को देश में शरण देने का समर्थन करते हुए कहा की भारतीय परम्पराओ का ख्याल रखते हुए इन्हें भारत में शरण देनी चाहिए.

नवभारत टाइम्स में लिखे लेख में वरुण गाँधी ने कहा की आजादी के बाद से करीब चार करोड़ शरणार्थी भारत की सीमा लांघ चुके हैं और अभी रोहिंग्याओं के बांग्लादेश पहुंचने के साथ ही हमारी सरहद पर एक और शरणार्थी संकट आ खड़ा हुआ है. दुनिया में कुल 6.56 करोड़ लोगों को जबरन उनके देश से निकाल दिया गया है जिसमें 2.25 करोड़ लोगों को शरणार्थी माना गया है. इसके अलावा एक करोड़ लोग और हैं जिन्हें राष्ट्रविहीन माना जाता है.

वरुण गाँधी आगे लिखते है,’ इन्हें कोई भी राष्ट्रीयता हासिल नहीं है और ये लोग साफ-सफाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और साधिकार रोजगार के बुनियादी अधिकारों से भी वंचित हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) की रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष और उत्पीड़न के कारण हर मिनट औसतन 20 लोग अपने घरों से बेघर किए जा रहे हैं.’ शरणार्थियो पर भारत के रवैये के बारे में भी वरुण गाँधी ने प्रतिक्रिया दी.

उन्होंने लिखा,’ भारत ने शरणार्थियों को लेकर बहुत सी मानवाधिकार संधियों (आईसीसीपीआर, आसीईएससीआर, सीआरसी, आईसीईआरडी, सीईडीएडब्ल्यू) पर हस्ताक्षर किया है. सभी संधियों में उन्हें वापस न भेजने का संकल्प दोहराया गया है लेकिन ऐसे संकल्पों का पालन करने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई कानून नहीं बनाया गया है.’ वरुण ने रोहिंग्या मुस्लिमो को भारत में शरण देने का समर्थन किया.

उन्होंने अंत में लिखा ,’ हमें म्यांमारी रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण जरूर देनी चाहिए लेकिन इससे पहले वैध सुरक्षा चिंताओं का आकलन भी करना चाहिए. स्वाभाविक रूप से अधिकांश शरणार्थी अपने घर लौटना चाहेंगे. हमें शांतिपूर्ण उपायों से अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उन्हें स्वेच्छा से घर वापसी में मदद करनी चाहिए. आतिथ्य सत्कार और शरण देने की अपनी परंपरा का पालन करते हुए हमें शरण देना निश्चित रूप से जारी रखना चाहिए.’

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