कुल की रस्म में उमड़ा जायरीनों का सैलाब, गुलाब और केवड़े से महका ख्वाजा का दरबार

12:06 pm Published by:-Hindi News

अजमेर: ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर 807 वां उर्स धुमधाम से मनाया जा रहा हैं। बुधवार को बरसों पुरानी परंपरा के अनुसार कुल की रस्म अदा की गई। केवड़े और गुलाब जल से यह रस्म निभाई गई और इसी के साथ गरीब नवाज के उर्स का अनौपचारिक रूप से समापन हो गया।

रस्म अदायगी के समय दरगाह शरीफ जायरीनो से लबालब भरी हुई थी। यह मंजर है ख्वाजा गरीब नवाज का जहां छोटे कुल की रस्म का अदा किया जा रहा था। ख्वाजा के दीवाने गुलाब जल से दरगाह शरीफ में आस्ताना शरीफ के चारों और बनी दीवारों को धोते हुए नजर आ रहे थे। यह सिलसिला देर रात तक इसी प्रकार से चलता रहा।

गुरुवार सुबह कुल की रस्म के लिए सुबह 9:00 बजे आस्ताना शरीफ आम जायरीनो के लिए बंद कर दिया जाएगा। इस दौरान खादिम समुदाय के लोग मजार शरीफ पर गुस्ल की रस्म को अदा करेंगे। जायरीनो की ओर से सुबह दरगाह के विभिन्न स्थानों की धुलाई गुलाब जल से की जाएगी।

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कव्वाली और नातिया मुशायरा

कायड़ विश्राम स्थली पर इस बार कव्वाली और नातिया मुशायरे का आयोजन भी हुआ। दरगाह कमेटी की ओर से इस बार यह कार्यक्रम रखा गया। दरगाह कमेटी सदर अमीन पठान ने बताया कि कव्वाली व नातिया मुशायरा का आयोजन हुआ। इसमें देश भर के कव्वाल और शायरों ने शिरकत की। इसके अलावा उर्स के मौके पर आने वाले विभिन्न दरगाहों के सज्जादानशीन का इस्तकबाल भी दरगाह कमेटी की ओर से किया गया।

बता दें कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती 11 वीं शताब्दी में अजमेर आए थे। यहीं से गरीबों की सेवा, परस्पर प्रेम और सूफी शिक्षाओं का पैगाम दिया। यहीं उनकी मजार शरीफ और दरगाह बनी हुई है।

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