Friday, September 17, 2021

 

 

 

बाबरी मस्जिद केस को लेकर उर्स ए आला हजरत पर जारी हुआ खास पैगाम

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सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद केस की सुनवाई पूरी हो चुकी है। ऐसे में बेसब्री से फैसले का इंतजार हो रहा है। बरेली में आयोजित हुए आला हजरत के 101वें उर्स मौके पर इस सबंध में खास पैगाम जारी किया गया है।

आला हजरत के पीरखाना मारहरा शरीफ के सज्जादानशीन रफीक ए मिल्लत हज़रत नजीब मियां ने उर्स के मंच से मुसलमानो को पैगाम देते हुए कहा कि मुल्क में अयोध्या मसले पर बड़ा फैसला आने वाला है। अगर फैसला तुम्हारे हक़ में आये तो खुदा का शुक्र और हक़ में न आये तो सब्र करना । किसी भी सियासी लोगों के भड़काने में हरगिज़ मत आना, सड़को पर मत उतरना । हर हाल में मुल्क में अमन कायम रखना । यहीं पैगाम खानकाह ए मारहरा का है और यही पैगाम खानकाह ए बरेली का है।

मारहरा शरीफ के ही सज्जादानशीन अमीन मियां ने हज़रत नजीब मियां के बयान की ताईद करते हुए कहा कि मुसलमानों के दो बड़े हथियार सब्र और शुक्र है इसको हरगिज़ नही छोड़ना । कुरान और हदीस की तालीमात पर अमल करते मसलक ए आला हज़रत पर मज़बूती से कायम रहना । उन्होंने पानी बचाने और बच्चों को दीनी और दुनियावी तालीम दिलाने की अपील की।

दरगाह आला हज़रत के सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) ने दुआ की शुरुआत ये शेर से की ” जान देकर भी उसूले वफ़ा छोड़ सकते नही, मर तो सकते हैं लेकीन उनसे वफा छोड़ सकते नही” । मुल्क में अमन ओ सुकून की दुआ के साथ तमाम खानकाहों में इत्तेहाद की अपील की । मुसलमानों की खुशहाली के लिए ख़ास दुआ की।

इस दौरान इंग्लैंड के फरोग-उल-कादरी ने कहा कि वहाबियत आज के दौर का सबसे बड़ा फितना है। अगर मुसलमानों ने आला हजरत के पैगाम पर अमल किया होता तो सीरिया, ईराक या अन्य मुस्लिम देशों का यह हाल नहीं होता। बोले, सऊदी अरब को आज ईरान, अमेरिका से नहीं, बल्कि बरेली से खतरा है। इमाम अहमद रजा के फतवों से डर है।

उन्होने कहा, खानकाहों और दर्सगाहों का जो वकार आज कायम है, वह आला हजरत की देन है। आला हजरत सिर्फ हिंदुस्तान के इमाम नहीं बल्कि सारी दुनिया के सुन्नी मुसलमानों के इमाम हैं। इंग्लैंड के मुस्लिम स्कॉलर मौलाना कमरुज्जमा आजमी ने कहा कि दुनिया की सभी यूनिवर्सिटी में आला हजरत पर पीएचडी की जा रही है। कारी जिक्रउल्ला ने कहा कि आला हजरत ने अपने फतवों को पैगंबरे इस्लाम का अतिया बताया।

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