भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल मंगलवार (12 मई) को वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाले संसदीय स्थायी समिति के सामने पेश हुए। इस दौरान स्थायी समिति ने उर्जित पटेल से नीरव मोदी-पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी, बैंकों के बढ़ते बैड लोन और नोटबंदी को लेकर सवाल किए।

समिति के सदस्यों ने आरबीआई गवर्नर से पूछा कि PNB मे घोटाले के बारे में कैसे पता नहीं चला। साथ ही समिति ने बैंकों में बढ़ते एनपीए पर भी चर्चा की। इस पर पटेल ने स्थायी समिति को बताया कि बैंकिंग क्षेत्र के एनपीए संकट को हल करने के लिए उपाय शुरू किए गए हैं।

संसदीय समिति ने आरबीआई गवर्नर से पूछा कि केंद्रीय बैंक ने एनपीए को बढ़ने क्यों दिया? इसे रोकने के लिए प्रयास क्यों नहीं किए गए. इसके अलावा समिति ने यह भी पूछा कि आख‍िरी बैंकों के एनपीए का संकट कितना बड़ा है? इस दौरान उर्जित पटेल ने समिति को बताया कि बैड लोन की समस्या को सुलझाने के लिए बड़े स्तर पर पहल की जा रही है। इस पहल का काफी  बेहतर नतीजे आए हैं।

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संसदीय समिति ने पिछले दिनों पैदा हुई कैश की किल्लत को लेकर भी आरबीआई गवर्नर से सवाल पूछा कि नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था में कैश फ्लो बढ़ा है, तो फिर कैश कहां जा रहा है? एटीएम मशीनें खाली क्यों हैं? समिति ने पूछा कि क्या आप लोग कैश अपने पास जमा रख रहे हैं?

बता दें कि रिजर्व बैंक के गर्वनर उर्जित पटेल को पूछताछ के लिए बुलाने का फैसला अप्रैल में हुई कमिटी की मीटिंग में लिया गया था। इस मीटिंग में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वीरप्पा मोइली के अलावा कई अन्य सांसदों ने भी हिस्सा लिया था।

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