बीते साल सितंबर महीने में हुए उरी हमले से संबंधों को लेकर पीओके के फैजल हुसैन अवान और अहसान खुर्शीद को आतंकियों की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया था, दोनों ने सेना को दिए अपने शुरुआती बयान में इस हमले को लेकर जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर की तरफ से दिए टास्क को पूरा करने की बात कबूली थी.

सेना को दिए गए इस बयान के अलावा एनआईए कोई पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाई, जिसकी वजह से दोनों के खिलाफ जांच रिपोर्ट बंद करने का फैसला लिया गया हैं. दोनों ही अब क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद वापस पाकिस्तान जा सकेंगे. पीओके में इनकी वापसी की तारीख गृह मंत्रालय की तरफ से तय की जाएगी.

कहा जा रहा हैं कि भारतीय सेना के जवान चंदू चव्हाण की हाल ही में पाकिस्तान से सुरक्षित अपने देश में वापसी के बाद अब फैजल और अहसान, दोनों को ही वापस इनके घर भेजा सकता है. पिछले महीने गलती से चव्हाण पाकिस्तानी सीमा पार चले गए थे.

एनआईए ने क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में सौंप दी है और रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने से इन्हें आरोपों से बरी किया जाता है. वहीं गौर करने वाली बात यह भी है कि दोनों युवाओं को लेकर कुछ मीडिया ग्रुप्स का यह भी दावा रहा है कि लड़के नाबालिग हैं और 10वीं क्लास के स्टूडेंट हैं.


शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

Loading...

कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें