केंद्रशासित प्रदेशों में बंटा जम्मू और कश्मीर, आधिकारिक भाषा उर्दू नहीं होगी हिंदी

देश के सबसे खूबसूरत राज्यों में से एक जम्मू-कश्मीर का आज विधिवत विभाजन हो गया है। देश की जन्नत कहे जाने वाले जम्मूू-कश्मीर और लद्दाख आज से केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं।

अब जम्मू-कश्मीर राज्य नहीं रह गया है। जम्मू-कश्मीर 114 सीटों की विधानसभा के साथ जबकि लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश होगा।  केंद्र सरकार के द्वारा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर सहित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित घोषित करने वाला राजपत्र (गजट) जारी कर दिया गया ।

अब दोनों केंद्रशासित प्रदेशों में रणबीर कानून की जगह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीआरपीसी) की धाराएं लागू होंगी। नए जम्मू-कश्मीर में पुलिस व कानून-व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन होगी, जबकि भूमि व्यवस्था की देखरेख का जिम्मा निर्वाचित सरकार के तहत होगी। जम्मू-कश्मीर में सरकारी कामकाज की भाषा अब उर्दू नहीं हिंदी हो जाएगी।

नए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 107 सदस्य हैं, जिनकी परिसीमन के बाद संख्या बढ़कर 114 तक हो जाएगी। वहीं, विधायिका में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लिए पहले की तरह ही 24 सीट रिक्त रखी जाएंगी।

ये बड़े बदलाव होंगे

1.    जम्मू-कश्मीर में पुडुचेरी, लद्दाख में चंडीगढ़ मॉडल लागू
2.    आधिकारिक भाषा उर्दू की बजाय हिन्दी हो जाएगी
3.    पहले हिन्दू अल्पसंख्यक थे, अब मुसलमान अल्पसंख्यक
4.    आधार, आरटीआई, आरटीई जैसे कानून यहां लागू होंगे

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