cb

cb

केंद्रीय विद्यालय के स्कूलों में हिन्दू धर्म से जुड़ीं प्रार्थना कराये जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है.

दरअसल, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली प्रार्थना हिन्दू धर्म को बढ़ावा दे रही है. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि केंद्रीय विद्यालयों में प्रार्थना क्यों होनी चाहिए? क्योंकि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल किसी भी धर्म का प्रचार-प्रसार नहीं कर सकते.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

याचिकाकर्ता ने कहा कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्‍कूलों में ऐसा नहीं होना चाहिए. याचिका में कहा गया है कि ये संविधान के अनुच्छेद 25 और 28 के खिलाफ है और इसे इजाजत नहीं दी जा सकती है.

याचिका में कहा गया, आर्टिकल 19 नागरिकों को मौलिक अधिकार के तहत अभिव्यक्ति का अधिकार भी देता है. ऐसे में छात्रों को किसी एक धार्मिक आचरण के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए.

याचिकाकर्ता का नाम विनायक शाह है जो कि पेशे से वकील हैं. शाह के बच्चे केंद्रीय विद्यालय से ही पासआउट होकर निकले हैं. देश में 1100 से अधिक केंद्रीय विद्यालय हैं. भारत से बाहर भी तीन विद्यालय हैं. इन स्कूलों में करीब 11 लाख स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं.

बता दें कि केन्द्रीय विद्यालयों में संस्कृत की ये प्रार्थनाएं होती हैं- असतो मा सदगमय! तमसो मा ज्योतिर्गमय! मृत्योर्मामृतं गमय!

Loading...