लखनऊ | उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मंगलवार को राज्य के किसानो को बड़ी सौगात देते हुए उनका कर्ज माफ़ कर दिया. चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश के किसानो से वादा किया था की सरकार गठन के बाद होने वाली पहली कैबिनेट बैठक में सभी सीमान्त और लघु किसानो का समस्त फसली ऋण माफ़ कर दिया जायेगा. अब चूँकि सूबे में बीजेपी सरकार को शपथ लिए हुए 15 दिन हो चुके है इसलिए सब लोग पहली कैबिनेट बैठक का इन्तजार कर रहे थे.

मंगलवार शाम 5 बजे जब योगी आदित्यनाथ ने अपनी पहले कैबिनेट मीटिंग बुलाई तो सभी किसानो की नजरे न्यूज़ चैनल पर जा टिकी. करीब डेढ़ घंटे चली बैठक के बाद सरकार के दो प्रवक्ता और मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और श्रीकांत शर्मा प्रेस कांफ्रेंस के लिए आये तो सबको यकीन हो गया की किसानो की कर्ज माफ़ी हो गयी है. प्रेस कांफ्रेंस में दोनों मंत्रियो ने कैबिनेट मीटिंग के फैसलों के बारे में जानकारी दी.

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इस दौरान मंत्रियो ने काफी बढ़ चढ़कर बाते की और किसानो की कर्ज माफ़ी के बारे में पूछने पर गोल मटोल जवाब दिए. उन्होंने बताया सूबे के 2.15 करोड़ सीमान्त और लघु किसानो का एक लाख रूपए तक कर्ज माफ़ कर दिया गया. पत्रकारों के बार बार पूछने पर भी उन्होंने बताया की सभी किसानो का कर्ज माफ़ किया गया है. लोन की समय सीमा के बारे में उन्होंने बताया की वित्त वर्ष 2016-17 में लिए गए लोन माफ़ किये गए है.

लेकिन असल बात दोनों मंत्री छुपा गए. बाद में वित्त विभाग की और से जारी प्रेस विज्ञप्ति में असलियत का खुलासा हुआ. दरअसल केवल उन किसानो का कर्ज माफ़ हुआ है जिन्होंने 31 मार्च 2016 तक फसली ऋण लिया हो. इस श्रेणी में केवल 86 लाख किसान आते है. इसलिए सभी किसानो का कर्ज माफ़ करने की बात कहकर मंत्रियो और सरकार ने प्रदेश को गुमराह किया है. इसके अलावा बीजेपी के संकल्प पत्र में भी कही नही लिखा है की केवल 31 मार्च तक लोन लेने वाले किसानो का कर्ज माफ़ किया जायेगा.

हालाँकि विपक्ष पहले ही सरकार की आलोचना कर चूका है लेकिन जैसे ही यह पता चला की केवल 86 लाख किसानो का कर्ज माफ़ हुआ है, उन्होंने और हमलावर रुख अपना लिया है. अखिलेश यादव ने इसे वादाखिलाफी बताते हुए कहा की प्रचार के दौरान कही नही कहा गया था की एक लाख तक कर्ज माफ़ होगा और केवल 31 मार्च 2016 तक लिए गए कर्ज माफ़ किये जायेंगे. यह किसानो के साथ सरासर धोखाधडी है.

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