लखनऊ | मंगलवार को भोपाल-उज्जैन एक्सप्रेस में हुए बम विस्फोट के बाद पकडे गए तीन संदिग्ध आतंकियों के इनपुट पर उत्तर प्रदेश पुलिस और एटीएस ने दो संदिग्धों को कानपुर से गिरफ्तार किया. इसके अलावा लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके की हाजी कॉलोनी के एक घर में छिपे सैफुल्ला को मार गिराया गया. इस पुरे मामले में दो राज्यों की एटीएस ने कार्यवाही की. लेकिन दोनों ही प्रदेश की आतंकियों को लेकर अलग अलग कहानी है.

उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड आर्डर) दलजीत चौधरी का मानना है की मारे गए संदिग्ध आतंकी के तार ISIS से नही जुड़े थे. जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में कहा की बम विस्फोट में शामिल सभी आतंकियों के सम्बन्ध ISIS से थे. उत्तर प्रदेश का कहना है की मारा गया आतंकी किसी भी आतंकी संगठन के साथ नही जुदा था वो ISIS से स्वयं प्रभावित था.

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बुधवार को दलजीत चौधरी ने प्रेस वार्ता कर सैफुल्ला के साथ हुई मुठभेड़ का ब्यौरा दिया. दलजीत ने बताया की सैफुल्ला सोशल मीडिया के जरिये ISIS से प्रभावित हुआ. उसने इन्टरनेट से बम बनाने की ट्रेनिंग ली लेकिन उसके पीछे सीधे सीधे ISIS का हाथ होने के कोई सबूत नहीं मिले है. कहा जा सकता है की वो सेल्फ radicalized था. दलजीत ने बताया की सैफुला के कमरे से काफी मात्रा में हथियार और ISIS का झंडा बरामद हुआ है.

उधर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पकडे गए आतंकियों के बारे में अलग ही राय रखते है. बुधवार को विधानसभा में बोलते हुए शिवराज ने कहा की सभी आतंकी ISIS से जुड़े है. उन्होंने भोपाल-उज्जैन एक्सप्रेस में विस्फोट करने के बाद घटनास्थल की तस्वीर, सीरिया में बैठे अपने हैंडलर को पोस्ट भी की. इस पोस्ट में उन्होंने लिखा की IS हम भारत में है. सभी आतंकी लखनऊ से भोपाल पहुंचे थे.

ऐसे में सवाल उठता है की आखिर दोनो राज्यों की सरकारों की आतंकियों को लेकर अलग अलग राय क्यों है और दोनों में से किसकी बात को सही माना जाया. बरहाल इस मामले ने अब राजनितिक रंग लेना शुरू कर दिया है. उम्मीद है कुछ ही दिनों में दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा.

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