कश्मीर पर UNSC की बैठक, भारत ने बताया आंतरिक मामला

1:06 pm Published by:-Hindi News

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान और चीन को तगड़ा झटका लगा है। सुरक्षा परिषद में कश्मीर पर चीन समर्थित पाकिस्तान की पहल को कोई समर्थन नहीं मिला। इस दौरान भारतीय कूटनीति का दमदार चेहरा उस समय देखने को मिला जब संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने अपनी हाजिरजवाबी और तथ्यों से पाकिस्तानी पत्रकारों की बोलती बंद कर दी।

सैयद अकबरुद्दीन ने मीडिया से कहा कि भारत का रुख यही था और है कि संविधान के अनुच्छेद 370 संबंधी मामला पूर्णतया भारत का आतंरिक मामला है और इसका कोई बाह्य असर नहीं है। भारत ने जम्मू-कश्मीर मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद कहा कि जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटाना पूरी तरह उसका आंतरिक मामला है और इसका कोई बाह्य असर नहीं है।

इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में कहा कि वार्ता शुरू करने के लिए उसे आतंकवाद रोकना होगा। चीन और पाकिस्तान के अनुरोध पर अनौपचारिक बैठक पूरी होने के बाद भारत के अकबरुद्दीन ने संवाददाताओं के प्रश्नों के उत्तर दिए जबकि चीन और पाकिस्तान के दूत अपने बयान देने के बाद तुरंत चले गए।

पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उन्होने कहा कि कुछ लोग कश्मीर में स्थिति को भयावह नजरिए से दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो वास्तविकता से बहुत दूर है. वार्ता शुरू करने के लिए आतंकवाद रोकिए। अकबरुद्दीन ने कहा कि जब देश आपस में संपर्क या वार्ता करते हैं तो इसके सामान्य राजनयिक तरीके होते हैं। यह ऐसा करने का तरीका है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल करने और अपने लक्ष्यों को पूरा करने जैसे तरीके को सामान्य देश नहीं अपनाते। यदि आतंकवाद बढ़ता है तो कोई भी लोकतंत्र वार्ता को स्वीकार नहीं करेगा। आतंकवाद रोकिए, वार्ता शुरू कीजिए।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार के हालिया फैसले और हमारे कानूनी निकायों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के हमारे लोगों के लिए सुशासन को प्रोत्साहित किया जाए, सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ाया जाए। अकबरुद्दीन ने एक घंटे से अधिक समय तक चली सुरक्षा परिषद की बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि हम खुश हैं कि सुरक्षा परिषद ने बंद कमरे में हुई चर्चा में इन प्रयासों की सराहना की और उन्हें पहचाना। अकबरुद्दीन ने कहा कि एक विशेष चिंता यह है कि एक देश और उसके नेतागण भारत में हिंसा को प्रोत्साहित कर रहे हैं और जिहाद की शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं। हिंसा हमारे समक्ष मौजूदा समस्याओं का हल नहीं है।

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