नई दिल्ली: जेएमआइयू  और एएमयू को एक साथ अल्पसंख्यक दर्जा रखने और केंद्रीय यूनिवर्सिटीज है और बीजेपी ने कहा है कि इसमें अल्पसंख्यक दर्जे को खत्म किया जाना चाहिए। कुछ लोगों का कहना है कि ‘अल्पसंख्यक दर्जा’ होने से समाज के कुछ तबकों की हायर एजुकेशन  तक पहुंच पाना बहुत मुश्किल होता है, जहाँ कुछ लोगों की राय है कि यह न सिर्फ मुसलमानों के अधिकारों के साथ बेइन्साफी होगी, बल्कि यह संविधान के खिलाफ भी होगा।

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जेएमआइयू के वाईस चांसलर तलत अहमद  ने कहा है कि इंस्टीटूट्स को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने के बारे में संविधान में प्रावधान है और इसे बरकरार रखा जाना चाहिए। जबकि जेएनयू के पूर्व वाईस चांसलर का कहना है कि अल्पसंख्यक दर्जा हो या नहीं यह अलग मुद्दा है लेकिन मुख्य मकसद यह होना चाहिए कि हायर एजुकेशन तक पहुंचने का हक़ सबको होना चाहिए। (hindi.siasat.com)

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