Saturday, June 19, 2021

 

 

 

विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में, बचाने के लिए करनी होगी कोशिश: डॉ. मनमोहन सिंह

- Advertisement -
- Advertisement -

कोलकाता: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारतीय विश्वविद्यालयों में स्वतंत्र सोच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में पड़ गई है. उन्होंने इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया हैं.

उन्होंने हैदराबाद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का हवाला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाना अलोकतांत्रिक है. उन्होंने कहा कि इस प्रकार से शैक्षिक संस्थानों में नकारात्मक असर पड़ेगा और छात्रों में सलाहियत की कमी आएगी.

पूर्व प्रधानमंत्री ने कोलकाता के प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में कहा, “मैं समझता हूं कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को ज्ञान को आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता अवश्य देनी चाहिए, भले ही वह ज्ञान स्थापित बौद्धिक और सामाजिक परंपरा से मेल ना रखता हो.हमें पूरी शिद्दत से इस स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए.”

उन्होंने कहा, “दुखद है कि भारतीय विश्वविद्यालयों में स्वतंत्र सोच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अब खतरे में है।.” पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “शैक्षणिक नियुक्तियों में राजनीतिक हस्तक्षेप अत्यधिक अदूरदर्शिता है.”

मनमोहन सिंह ने शैक्षिक संस्थानों की खुदमुख्तारी की वकालत करते हुए कहा कि इसकी हिफाज़त के लिए हमें कोशिश करनी चाहिए और अभिव्यक्ति की आजादी को अलोकतांत्रिक तरीके से दबाने की कोशिश के खिलाफ एकजुट होने की ज़रूरत है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles