सन 2000 से 2001 के दौरान अटलबिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार द्वारा आरएसएस के धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों को जमीन आवंटित की गई थी लेकिन यूपीए प्रथम ने इस फैसले को रद्द कर दिया था. लेकिन अब मोदी सरकार ने इस फैसले को पलटते हुए फिर से ज़मीन आवंटन के लिए कैबिनेट में मंजूरी दे दी.

केंद्रीय मंत्री एम.वेंकैया नायडू कहा कि यह जमीन साल 2000-01 के दौरान सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं को दी गई थी. लेकिन यूपीए-1 ने इन्हें रद्द कर दिया, जिसके बाद आवंटियों ने इसे अदालत में चुनौती दी. उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार ने कैबिनेट के इस फैसले को सार्वजनिक नहीं किया है क्योंकि इसे अन्य फैसलों के साथ ही मीडिया को बताया जाएग.

नायडू ने आगे कहा कि एनडीए के सत्ता में आने के बाद इन संस्थाओं ने प्रतिनिधि बनाए और मंत्रालय ने इस मामले को देखने के लिए दो रिटायर्ड सचिवों का एक पैनल बनाया गया. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार का फैसला भेदभाव भरा था. उन्होंने कहा कि इस मामले को मैंने कैबिनेट में उठाया और इसके बाद कुछ को छोड़कर बाकी सभी को जमीन आवंटित कर दी गई. यूपीए सरकार ने यह कहते हुए 29 संस्थाओं का जमीन आवंटन रद्द कर दिया था कि प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ियां हैं.

याद रहें कि जिन संस्थाओं को जमीन वापस मिली है उनमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी समिति न्यास, विश्व संवाद केंद्र, धर्मयात्रा महासंघ और अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम शामिल है.


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