Thursday, July 29, 2021

 

 

 

मोदी राज में बेरोजगारी ने तोड़ा रिकॉर्ड, बेरोजगारी दर 7.2 फीसदी पहुंची

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मंगलवार को जारी किए गये सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) द्वारा संकलित आँकड़ों के अनुसार, फरवरी 2019 में भारत में बेरोजगारी दर सितंबर 2016 के बाद सबसे उच्च स्तर 7.2% पर पहुँच गयी, जो एक साल पहले फरवरी 2018 में 5.9% पर थी।

मुंबई के एक थिंक टैंक के प्रमुख महेश व्यास ने Reuters से बातचीत में बताया कि बेरोजगारी दर में इतनी भारी बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब जॉब खोजने वालों की संख्या कम हुई है। महेश व्यास ने बताया कि पिछले साल फरवरी में 40.6 करोड़ लोग काम कर रहे थे जबकि इस साल यह आंकड़ा 40 करोड़ है।

सीएमआईई के आँकड़े पूरे भारत के हजारों घरों के सर्वेक्षण पर आधारित हैं। कई अर्थशास्त्रियों द्वारा इन आँकड़ों को सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले बेरोजगारी के आँकड़ों की तुलना में अधिक विश्वसनीय माना जाता है। मई में संभावित आम चुनाव से पहले बेरोजगारी दर में ऐसी वृद्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए चिंता का सबब बन सकती है।

फसलों की कम कीमत और रोजगार कमी का मुद्दा चुनावों में जोर-शोर से उठता है। मोदी सरकार ने पिछली बार जब आधिकारिक डेटा जारी किया था तो उसे आउट-ऑफ-डेट बताया गया था। हाल ही में सरकार ने रोजगार से जुड़ा एक डेटा रोक लिया था, अधिकारियों ने कहा कि उन्‍हें जांचना है कि वह डेटा सही है या नहीं।

दिसंबर में जारी होने से रोके गए आंकड़ों को एक समाचार पत्र ने कुछ सप्‍ताह पहले प्रकाशित किया था। तब यह बात सामने आई थी कि भारत की बेरोजगारी दर 2017-18 में कम से कम 45 साल के उच्‍चतम स्‍तर पर पहुंच गई थी।

जनवरी में जारी CMIE की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि नवंबर 2016 में नोटबंदी और 2017 में माल एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद से 2018 में 1.1 करोड़ लोगों ने नौकरियां गंवाई। सरकार ने फरवरी में संसद को बताया था कि उसके पास यह डेटा नहीं है कि नोटबंदी से लघु क्षेत्र में रोजगार पर कितना असर पड़ा।

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