Tuesday, July 27, 2021

 

 

 

RTI से हुआ खुलासा – तोहफे में नहीं बल्कि दबाव में दिया था अंग्रेजों को कोहिनूर

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कोहिनूर हीरे को लेकर साल 2016 में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि ब्रिटिशों द्वारा कोहिनूर हीरा न तो जबरन लिया गया और न ही चोरी किया गया था। सरकार ने कहा था कि इसे उस समय पंजाब पर शासन करने वाले महाराजा रणजीत सिंह के उत्तराधिकारी द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी को उपहार में दिया गया था

लेकिन अब इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने आरटीआई के जवाब में सरकार के उस जवाब का खंडन किया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण न बताया है कि कोहिनूर हीरा वास्तव में लाहौर के महाराजा द्वारा इंग्लैंड की रानी विक्टोरिया को ‘सरेंडर’ किया गया था।

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, एएसआई ने जवाब के लिए लाहौर संधि का जिक्र किया। इसमें बताया गया कि 1849 में ईस्ट इंडिया कंपनी के लॉर्ड डलहौजी और महाराजा दलीप सिंह के बीच संधि हुई थी। इसमें महाराजा से कोहिनूर सरेंडर करने के लिए कहा गया था।

एएसआई ने साफ किया है कि संधि के दौरान दलीप सिंह (जो कि उस वक्त सिर्फ नौ साल के थे) ने अपनी मर्जी से महारानी को हीरा भेंट नहीं किया था, बल्कि उनसे कोहिनूर जबरन लिया गया था। हालांकि इससे पहले सरकार ने कहा था कि पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के उत्तराधिकारी ने एंग्लो-सिख युद्ध के खर्च के बदले ‘स्वैच्छिक मुआवजे’ के रूप में अंग्रेजों को कोहिनूर भेंट किया था।

कोहिनूर दुनिया का सबसे मशहूर हीरा है। मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गोलकोंडा खनन क्षेत्र में निकला कोहिनूर 793 कैरेट का था, अब यह 105.6 कैरेट का रह गया है जिसका वजन 21.6 ग्राम है। एक समय इसे दुनिया का सबसे बड़ा हीरा माना जाता था। कोहिनूर के बारे में पहली जानकारी 1304 के आसपास की मिलती है, तब यह मालवा के राजा महलाक देव की संपत्ति में शामिल था।

इसके बाद इसका जिक्र बाबरनामा में मिलता है। मुगल शासक बाबर की जीवनी के मुताबिक, ग्वालियर के राजा बिक्रमजीत सिंह ने अपनी सभी संपत्ति 1526 में पानीपत के युद्ध के दौरान आगरा के किले में रखवा दी थी। बाबर ने युद्ध जीतने के बाद किले पर कब्जा जमाया और तब 186 कैरेट के रहे हीरे पर भी कब्जा जमा लिया, तब इसका नाम बाबर हीरा पड़ गया था।

इसके बाद ये हीरा मुगलों के पास ही रहा। 1738 में ईरानी शासक नादिर शाह ने मुगलिया सल्तनत पर हमला किया। 1739 में उसने दिल्ली के तब के शासक मोहम्मद शाह को हरा कर उसे बंदी बना लिया और शाही खजाने को लूट लिया। इसमें बाबर हीरा भी था, इस हीरे का नाम नादिर शाह ने ही कोहिनूर रखा।

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