Tuesday, May 17, 2022

योगी राज में फर्जी एनका’उंटर को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार ने जताई चिंता

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश पुलिस में फर्जी मुठभेड़ के मामले में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने भारत सरकार के समक्ष गहरी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने प्रदेश में न्यायिक हिरासत में ह’त्याओं के 15 मामलों को लेकर सरकार को पत्र लिखा है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के लिए उच्चायुक्त का कार्यालय (ओएचसीएसआर) के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार ने अभी तक उनके पत्र का कोई जवाब नहीं दिया है और उन्हें इन ह’त्याओं के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त हो रही है.

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने जिन मामलों को लेकर भारत सरकार को पत्र लिखा है और उनमें पीड़ित मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारीयों ने पत्र में कहा है, ‘हम इन घटनाओं के स्वरूप से चिंतित हैं कि पीड़ित की ह’त्या करने से पहले उसे गिरफ्तार किया जा रहा है या उसका अपहरण हो रहा है। पीड़ित के शरीर पर निशान यातनाओं को बयान कर रहे हैं।’

2017 में यूपी पुलिस ने बताया था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के छह महीनों में 420 एनका’उंटर हुए जिसमें 15 लोग मा’रे गए। 2018 तक यूपी पुलिस ने 1,038 एनका’उंटर किए थे जिसमें 32 मा’रे गए थे।

ओएचसीएसआर का कहना है कि सबूतों के और मामलों के स्वरूप के अनुसार, ये सभी मामले हिरासत में ह’त्या का मालूम पड़ते हैं। पुलिस अक्सर इन मामलों में मौ’त का कारण मुठभेड़ (एनका’उंटर) या आत्मरक्षा का मामला बताती है।

ओएचसीएचआर के विशेषज्ञ ‘पीपल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र’ (2014) मामले का हवाला देते हुए कहते हैं कि भारत सरकार इस मामले में निर्धारित दिशा निर्देशों का पालन नहीं कर रही है कि कैसे जांच की जाए।

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि इन एनका’उंटर में हुए हत्याओं की तत्काल समीक्षा करने की आवश्यकता है ताकि यह पता चल सके कि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। इन मौतों की त्वरित स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की जानी चाहिए, ताकि इन मामलों में कारवाई की जाए।

उन्होंने परिवार और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखने को कहा है। ओएचसीएचआर अधिकारी सरकार और पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए बयानों से भी चिंतित हैं, जो हत्याओं को सही ठहराने, उचित ठहराने या मंजूरी देने के लिए स्पष्टीकरण देते है।

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