Sunday, August 1, 2021

 

 

 

जम्मू-कश्मीर में बच्चों के खिलाफ पैलेट गन का उपयोग हो बंद: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख

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संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने जम्मू-कश्मीर में बच्चों की मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत सरकार से बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होने कहा कि बच्चों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल भी बंद किया जाए।

गुतारेस ने कहा, ”जम्मू-कश्मीर में बच्चों के हताहत होने को लेकर मैं चिंतित हूं और सरकार से मांग करता हूं कि वह बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाएं और बच्चों के खिलाफ पैलेट का इस्तेमाल बंद किया जाए।” महासचिव ने नक्सली आतंकवाद के मुद्दे पर भी कहा कि भारत सरकार की कोशिशों की वजह से नक्सली संगठनों में बच्चों की भर्ती, मौतों और बच्चों के अपंग होने की संख्या में कमी आई है।

बच्चे और सशस्त्र संघर्ष (चिल्ड्रन एंड आर्म्ड कंफ्लिक्ट) विषय पर महासचिव की रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र ने पुष्टि की है कि जनवरी से दिसंबर, 2019 में बच्चों के साथ वैश्विक स्तर पर 25,000 जघन्यअपराधों की घटनाएं हुईं। इस रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि भारत में उसने एक साल से 17 साल के आठ बच्चों की हत्या और सात के गंभीर रूप से अपंग होने की पुष्टि की है. इनमें से 13 लड़के हैं और दो लड़कियां हैं।

यह घटना केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारतीय सेना (राष्ट्रीय राइफल) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह के संयुक्त अभियान, लश्कर-ए-तैयबा, अज्ञात सशस्त्र संगठनों की हिंसा या फिर नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी के दौरान हुई है। संयुक्त राष्ट्र ने जम्मू-कश्मीर में ‘अज्ञात’ तत्वों द्वारा नौ स्कूलों पर हमले की पुष्टि भी की है।

गुतारेस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी संज्ञान लिया कि झारखंड में करीब 10 बच्चों को भारतीय पुलिस ने नक्सलियों के चंगुल से बचाया। इन बच्चों का नक्सलियों ने कथित तौर पर अपहरण कर लिया था और इनका इस्तेमाल अपने समर्थन में या लड़ाई में कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ”मैं बच्चों को हिरासत में लेने, रात में छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किए जाने, सेना के शिविरों में नजरबंदी, हिरासत के बाद प्रताड़ित या बिना किसी आरोप या तय प्रक्रिया की जगह प्रताड़ित करने को लेकर भी चिंतित हूं। मैं सरकार से अपील करता हूं कि वह तत्काल इस चलन को बंद कर दें। मैं यह संज्ञान में लेता हूं कि सरकार ने हिरासत में लिए गए कुछ की उम्र का सत्यापन किया है और मैं अपील करता हूं कि इसको एक तय प्रणाली में लाया जाए।”

संयुक्त राष्ट्र ने यह भी संज्ञान में लिया कि सरकार की कोशिशों की वजह से नक्सली संगठनों द्वारा बच्चों को भर्ती किए जाने, हत्या या उनको घायल करने के मामलों में कमी आई है। उन्होंने कहा कि हालांकि नक्सली संगठनों की वजह से बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच नहीं होना, अब भी खास तौर पर छत्तीसगढ़ और झारखंड में चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, ”मैं स्कूलों पर हमले से चिंतित हूं, लेकिन इस बात से उत्साहित हूं कि सरकार ने इन अपराधियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।”

गुतारेस ने इस बात पर जोर दिया कि भारत सरकार राष्ट्रीय बचाव और जवाबदेही कदमों को सभी बड़े उल्लंघनों के लिए जल्द से जल्द लागू करे। भारत ने 2019 में इस विषय पर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की रिपोर्ट पर गहरी निराशा जाहिर करते हुए कहा था कि इस तरह का प्रयास कुछ निश्चित स्थितियों में ‘चुनिंदा’ तरीके से राय बनाना एजेंडे को सिर्फ राजनीतिक रंग देता है। भारत के एक वरिष्ठ राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र में पिछले साल अगस्त में इस रिपोर्ट को लेकर निराशा व्यक्त करते हुए कहा था कि इसमें उन ऐसी स्थितियों को शामिल किया गया है जो सशस्त्र संघर्ष या अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरे वाली नहीं हैं।

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