दिल्‍ली दंगों (Delhi Riots) में संलिप्‍तता के आरोप में गिरफ्तार उमर खालिद (Umar Khalid) को 10 दिन (24 सितंबर तक) की पुलिस रिमांड दी गई है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कड़कड़डूमा कोर्ट को बताया था कि उन्हें आरोपी उमर खालिद को 11 लाख पन्नों वाले डेटा से रूबरू कराना है। इस वजह से 10 दिन की रिमांड चाहिए।

हालांकि उमर खालिद के वकील ने कस्टडी मांगे जाने का विरोध किया। उमर खालिद के वकील ने कहा कि उसकी जान को खतरा है। उमर खालिद ने सीएए का विरोध किया है। सरकार के किसी फैसले का विरोध करना अपराध की श्रेणी में कैसे आ सकता है। उमर खालिद के वकील त्रिदीप पाइस ने कोर्ट से कहा कि दिल्ली हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस बेवजह उनके मुवक्किल को फंसा रही है।

वहीं दूसरी और उमर खालिद (Umar Khalid) की गिरफ्तारी का कई बुद्धिजीवियों ने विरोध किया है। 9 रिटायर्ड आईपीएस अफसरों ने अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) को हटाया जाना चाहिए। 9 आईपीएस के अलावा सैयदा हमीद, अरुंधति रॉय, रामचंद्र गुहा, टीएम कृष्णा, वृंदा करात, जिग्नेश मेवाणी, पी साईनाथ, प्रशांत भूषण और हर्ष मंदर समेत करीब 36 लोगों ने भी इसका विरोध किया है।

उन्‍होंने एक बयान में कहा, ‘संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध नागरिकों के रूप में हम उमर खालिद की गिरफ्तारी की निंदा करते हैं। सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को निशाना बनाया गया। गहरी पीड़ा के साथ हमें यह कहने में कोई संदेह नहीं है कि यह जांच हिंसा के बारे में नहीं है, बल्कि पूरे देश में असंवैधानिक सीएए के खिलाफ पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के विरोध में है।’

वहीं रिटायर्ड आईपीएस अफसर जूलियो रिबेरो ने रविवार को दिल्‍ली पुलिस कमिश्‍नर को पत्र लिखकर उत्‍तर पूर्वी दिल्‍ली में दंगों के केस की जांच पर सवाल उठाए। रिबेरो मुंबई पुलिस कमिश्‍नर, गुजरात और पंजाब के डीपीजी और रोमानिया में भारतीय राजदूत रह चुके हैं। सोमवार को 9 और रिटायर्ड अफसरों ने दिल्‍ली पुलिस कमिश्‍नर को खुला पत्र लिखकर दंगों की दोबारा जांच की मांग की है।

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