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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ‘उज्ज्वला गैस योजना’ के तहत फ्री गैस कनैक्शन देने का दावा किया था। इस दावे के विपरीत सरकार ने गरीबों को ये कनैक्शन कर्ज पर देकर पैसे वसूले है।

इस योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी ने गैस कनेक्शन लेते ही कुल 1750 रुपये चुकाए है। इनमें से 990 रुपये गैस चूल्हे के लिए और 760 रुपये पहले सिलेंडर के लिए दिए है। सरकार ने सिर्फ 150 रुपये का रेग्यूलेटर फ्री दिया।

मोदी सरकार ने एक बड़ा दावा ये भी किया था कि प्रति गैस कनेक्शन उपभोक्ता को 1600 रुपये की सब्सिडी दी गई। ये भी झूठा है। इतना ही नहीं पीतल बर्नर वाले चूल्हे की जगह लोहे का बर्नर लगा चूल्हा दिया गया। साथ ही गैस पाइप भी छोटा दिया गया है।

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हर उपभोक्ता ने  गैस कनेक्शन की कीमत सब्सिडी की राशि के रूप मे चुकाई है। यानि 1740 रुपये वसूल नहीं होने पर मोदी सरकार ने गेस सब्सिडी उपभोक्ता के खातों मे पहुँचने नहीं दी।

हालांकि सरकार की जब यह योजना फेल होने लगी तब चुनावी साल में अप्रैल 2018 से उज्ज्वला योजना के गैस सिलेंडर पर भी सब्सिडी देने का फैसला किया गया है। यानी सरकार ने 1750 रुपये की सब्सिडी (कर्ज) की रिकवरी फिलहाल टाल दी है।

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