भारतीय विशिष्ठ पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बड़ा दावा करते हुए कहा कि गूगल और स्मार्ट कार्ड लॉबी आधार को सफल नहीं होने देना चाहती है.

UIDAI ने कहा कि अगर आधार योजना पहचान का विश्वसनीय और आसान तरीका साबित होती है तो गूगल और स्मार्ट कार्ड लॉबी का धंधा बंद हो जाएगा और यही वजह है कि वे आधार योजना की सफलता नहीं चाहते.

यूआईडीएआई की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली बेंच को बताया कि आधार को लेकर एक अभियान चलाया गया था जिसका मकसद था आधार कार्ड को यूरोपीय वाणिज्यिक उद्यम पर आधारित स्मार्ट कार्डों की तरह बनाना.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि नागरिकों की निजी जानकारी का दुरुपयोग कर चुनाव पर असर डाला जा सकता है. पीठ ने कहा कि ये ‘आशंकाएं काल्पनिक’ नहीं हैं. उन्होंने कहा कि डेटा सुरक्षा संबंधी मजबूत कानून नहीं होने की स्थिति में जानकारी के दुरुपयोग का मुद्दा प्रासंगिक हो जाता है.

पीठ ने कहा, ‘वास्तविक आशंका इस बात को लेकर है कि डेटा एनालिसिस के जरिये चुनावों को प्रभावित किया जा रहा है. ये समस्याएं उस दुनिया की झलक हैं, जहां हम रहते हैं. इस पर द्विवेदी ने कहा, ‘कृपया कैंब्रिज एनालिटिका मामले को आधार से न जोड़ें. आधार में जिस तरीके से डेटा लिया जाता है वो कैंब्रिज एनालिटिका मामले से अलग है. आधार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल नहीं किया जाता.’

यूआईडीएआई के वकील ने कहा कि आधार को लेकर इस तरह का डर पैदा किया जा रहा है कि जैसे यह कोई परमाणु बम है जो कभी भी फट सकता है. उनके मुताबिक सच यह है कि डेटा को सबसे अच्छे तरीके से सुरक्षित रखा गया है.

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