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मालेरकोटला | गौरक्षा के नाम पर देश में बढती गुंडागर्दी कितनी भयावह है इसकी बानगी हमें हमें हरियाणा और गुजरात में देखने को मिल चुकी है. हरियाणा में जहाँ दो मुस्लिम युवको को गौरक्षा के नाम पर गोबर तक खिला दिया गया वही गुजरात के उना में चार दलित युवको की बेरहमी से पिटाई की गयी. पुरे देश में अचानक से गौरक्षक डर का कारण बन गए. लेकिन क्या अपने आप को गौरक्षक कहने वाले ऐसा कोई काम करते है जिससे इन्हें गौरक्षक कहा जाए?

देश में कई ऐसे उदहारण देखने को मिले है की जिन मुस्लिमो को गौरक्षक अपनी गुंडागर्दी का शिकार बनाते है वो ही कई मौके पर असल गौसेवा करते हुए दिखाई दिए. जबकि सडको पर भूखी प्यासी प्लास्टिक खाती गायो की सुध लेने वाला शायद ही कोई गौरक्षक आपको दिखाई दिए. अब पंजाब में एक ऐसा ही उदहारण देखने को मिला है. यहाँ दो मुस्लिम युवको ने अपने आपको असल गौरक्षक साबित किया है.

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पंजाब के मलेरकोटला के रहने वाले शमसुद्दीन चौधरी और मुबीन नामक युवको ने एक घायल गाय को समय पर उपचार दिलाकर उसकी जान बचा ली. शमसुद्दीन ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया की शनिवार की रात मैं अपनी गाडी से ड्राईवर करते जा रहा था की मेरी नजर एक घायल गाय पर पड़ी. मैं गाडी रोककर देखा तो गाय के शरीर से काफी खून बह रहा था.

शमसुद्दीन ने बताया की ऐसा लग रहा था जैसे किसी गाडी ने गाय को टक्कर मारी हो. घायल गाय को देखकर मैंने तुरंत अपने दोस्त मुबीन को फ़ोन लगाया तो वो भी वहां पहुँच गया. इस दौरान मैंने पुलिस को भी फ़ोन किया लेकिन वहां से कोई जवाब नही मिला . इसके बाद मैंने एसडीएम शौकत अगमद परे को फ़ोन किया तो उन्होने तुरंत मदद भेजी और गाय को बचा लिया गया.

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