बरेली: ताजुशरिया मुफ़्ती मुहम्मद अख्तर रज़ा खान कादरी अज़हरी उर्फ अज़हरी मियां का शुक्रवार की शाम करीब 6 बजे इंतकाल हो गया है। उनकी जनाजे की नमाज इस्लामिया कॉलेज मैदान में रविवार को सुबह होगी।

देश के सुन्नी बरेलवी मुलसमानों के सबसे बड़े मज़हबी रहनुमाओं में से एक ताजुशरिया के इंतकाल के साथ ही उनके देश-विदेश में मौजूद मुरीद और चाहने वाले बरेली पहुँच रहे है। माना जा रहा है उनके जनाजे में लाखों की तादाद में लोग शरीक होंगे। भीड़ के आने का सिलसिला शुरू हुआ और रात से लगातार जारी है, उसे देखकर लग रहा है कि जनाजे की नमाज में इस्लामिया इंटर कॉलेज का मैदान छोटा पड़ सकता है।

ताजुशरिया के इंतकाल की खबर से आलम ए इस्लाम में शोक की लहर दोड़ गई है।तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान ने कहा कि ताजुशरिया का यूं चले जाना गहरा सबके लिए गहरा सदमा है।

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बता दें कि ताजुशरिया मुफ़्ती अख्तर रज़ा खान क़ादरी अज़हरी काफी समय से बीमार चल रहे थे। बेटे मौलाना असजद रज़ा खान व उनके दामाद सलमान हसन खान द्वारा उनकी देखभाल की जा रही थी कुछ दिन पहले ही उन्हें हॉस्पिटल में भी भर्ती कराया गया था, लेकिन बीमारी के चलते वह चल फिर भी नहीं पा रहे थे।

तहफ्फूज़े नामूसे रिसालत एक्शन ट्रस्ट के अध्यक्ष मौलाना सैफुल्लाह खां अस्दक़ी ने बताया कि हुज़ूर ताजुश्शरीया ने अरबी, फ़ारसी, उर्दू आदि भाषाओं में दर्जनों किताबें लिखीं हैं। आपने इस्लामी दुनिया के सबसे प्राचीन और बड़े विश्व विद्यालय जामिया अज़हर, क़ाहिरा, मिस्र में तालीम हासिल की थी। आपको बेहतरीन तालीमी रिकॉर्ड के लिए मिस्र के राष्ट्रपति कर्नल अब्दुल नासिर के हाथों फख्रे अज़हर का अवार्ड भी मिला था। आप भारतीय उपमहाद्वीप में अहले सुन्नत व जमाअ़त के बड़े और बुजुर्ग आलिमों में से एक थे। आपको इमाम अहमद रजा फाजिले बरेलवी का इल्मी जानशीन कहा जाता है।

उन्होने बताया, आलमे इस्लाम में आपकी प्रसिद्धि का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जॉर्डन की राजधानी अम्मान के रॉयल स्ट्राजिक सेंटर से हर साल जारी होने वाली दुनिया के 500 प्रभावशाली मुसलमानो की लिस्ट में टॉप 25 मशहूर शख्सियत में शामिल रहे हैं।