Thursday, December 9, 2021

जजों में दिखे मतभेद , पांच में से तीन जजों ने तीन तलाक को बताया असंवैधानिक

- Advertisement -

नई दिल्ली | देश में एक बड़े मुद्दे के रुप में सामने आये तीन तलाक पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को छह महीने के अन्दर इस पर कानून बनाने का आदेश दिया. पांच जजों की पीठ ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा की कानून बनाने का काम संसद का है. इसलिए छह महीने के अन्दर इस पर कानून बनाया जाए. इस दौरान तीन तलाक को रद्द करने का आदेश दिया गया.

तीन तलाक पर फैसला सुनाने के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों में भी मतभेद दिखाई दिया. जहाँ पहले चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने फैसला पढ़ते हुए कहा की तलाक ए बिद्दत संविधान के आर्टिकल 14,15,21 और 25 का उल्लंघन नहीं करता इसलिए हम इसे असंवैधानिक नही कह सकते. लेकिन तीन जज , जस्टिस जेएस खेहर की बात से असहमत दिखे. उन्होंने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मुद्दे पर पांच जज, चीफ जस्टिस जेएस खेहर ,जस्टिस नरीमन, जस्टिस ललित, जस्टिस कुरियन और जस्टिस नजीर ने अपना फैसला सुनाया. इनमे से जस्टिस नरीमन , जस्टिस ललित और जस्टिस कुरियन ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया. जहाँ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा की तीन तलाक पर्सनल लॉ बोर्ड का मामला है वही जस्टिस कुरियन उनकी बात से असहमत दिखे. उन्होंने कहा की तीन तलाक इस्लाम का जरुरी हिसा नही है.

अंत में तीन तलाक को 3-2 से सीधे तौर पर ख़ारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गेंद केंद्र सरकार के पाले में आ गयी है. अब वो इस पर क्या और कैसा कानून लेकर आती है, यह देखने वाली बात होगी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन सभी मुस्लिम महिलाओं को जरुर राहत मिली होगी जो तीन तलाक से पीड़ित थी. दरअसल हाल में कई ऐसे मामले सामने आये जिसमे मुस्लिम महिला को , व्हाट्सएप, फेसबुक, लैटर के जरिये तीन तलाक दे दिया गया.

- Advertisement -

[wptelegram-join-channel]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles