लोकसभा में गुरुवार की तीन तलाक के खिलाफ बिल पेश करने के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि  यह बिल महिलाओं की गरिमा की हिफाजत के लिए है. बिल के जरिए शरीयत में कोई दखल नहीं है.

उन्होंने कहा, आज का दिन ऐतिहासिक है. आज हम इतिहास बना रहे हैं. कुछ सदस्यों की आपत्तियों पर मैं ये कहना चाहूंगा कि ये पूरा कानून किसी पूजा, इबादत या महजब का नहीं है. यह कानून नारी की गरिमा का है. सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत को गैर-कानूनी कहा है. उसके बाद भी ये तलाक चलता है और महिलाओं के साथ नाइंसाफी होती है तो क्या यह सदन खामोश रहेगा?

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कानून मंत्री ने कहा, ‘‘आज यहां सदस्य इसे संविधान के बुनियादी हक के खिलाफ बता रहे हैं लेकिन आज इस सदन को यह तय करना है कि तीन तलाक की पीड़ित महिलाओं का बुनियादी हक है या नहीं? मैं यह कहना चाहता हूं कि अगर तीन तलाक गैर-कानूनी हो गया और पति अपनी पत्नी को तीन तलाक कहकर बाहर कर दिया. आज ही रामपुर में एक महिला को तीन तलाक दिया गया. ऐसी प्रथा के खिलाफ कानून बनाने का इस सदन को पूरा अधिकार है.’’

उन्‍होंने कहा कि बांग्‍लादेश, इजिप्‍ट और इंडोनेशिया में इस कानून को खानिज किया गया है. पाकिस्‍तान एक आतंकवादी मुल्‍क और वहां भी इस कानून को खारिज किया गया है. उन्‍होंने कहा कि इस्‍लामिक मुल्‍क में भी इंस्‍टैंट तीन तलाक को खारिज किया है. वहां तलाक देने से पहले नोटिस देना होता है और अगर ऐसा नहीं करते हैं तो एक साल की जेल हो सकती है.

रविशंकर ने कहा इसे राजनीति से ना जोड़े. मजहब के तराजू पर बिल को ना तौला जाए. धर्म या राजनीति के लिए यह बिल नहीं लेकर आए हैं.