जमात-ए -इस्लामी देश भर में मुस्लिम पर्सनल लॉ जागरूकता अभियान चला रहा हैं. इसी अभियान के तहत मस्जिद शहाब बटला हाऊस में प्रोग्राम रखा गया जिसमे बोर्ड के सदस्य इकबाल मुल्ला का कहना है कि मुल्क में तीन तलाक के मामले गिनती के हैं, लेकिन इसके बारें में दुष्प्रचार ज्यादा किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि शरीयत के हिसाब से बना कानून हिदायते इलाही की बुनियाद पर है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि मुस्लिम समाज में बड़ी बुराई है, जबकि महिलाओं के हक व उनकी अन्य समस्याओं पर अब कोई काम करना बाकी नहीं रह गया है.

उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को मुल्क में फंडामेटल राइट्स के तहत शरीयत के हिसाब से जिंदगी जीने का अधिकार है, लेकिन हुकूमत सिविल कोड लागू करने पर उतारू है. मुल्क में 24 साल तक महिलाओं को को मुफ्त तालीम देने की व्यवस्था है, लेकिन कितनी ख्वातीनों को मुफ्त तालीम दी जा रही है. बच्चे मजदूरी कर रहे हैं. सरकार लोगों को बदलने का काम करने के बजाय कानून बदलने की बात कर रही है

वहीँ मौलाना इनामुल्लाह फ़लाही ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लाम जीवन के सभी पहलुओं में पथ उठाता और विश्वास करने वालों के लिए नियमों प्रदान करता है. इन नियमों का एक हिस्सा वह है जो परिवार प्रणाली निर्देश दिए गए हैं और लोगों परिवार अधिकार और जिम्मेदारियों निर्धारित किया गया है. ऐसे में मुस्लिमों को जागरूक करने की जरूरत हैं.

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