Sunday, December 5, 2021

ट्रिपल तलाक असंवैधानिक नहीं, यह मुस्लिम कानून का अहम् हिस्सा: चीफ जस्टिस खेहर

- Advertisement -

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के पाले में गेंद डाली अब मोदी सरकार ट्रिपल तलाक पर कानून बनाएगी

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत तीन तलाक पर केंद्र सरकार को कानून बनाने का आदेश देते हुए 6 महीने के लिए रोक लगा दी है. 11 से 18 मई तक रोजाना सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है.

जस्टिस खेहर ने अपने फैसले में अपहोल्ड शब्द का इस्तेमाल किया है. उन्होंने कहा है कि तीन तलाक बना रहेगा. हालांकि छह महीने तक रोक रहेगी. चीफ जस्टिस खेहर ने कहा कि एक हज़ार साल से सुन्नी समाज का अहम् हिस्सा रही है और यह संविधान के खिलाफ नहीं है.

पांच जजों में से तीन ने माना असंवेधानिक

आपको बता दे कि तीन तलाक़ को पांच में से तीन जजों ने इसको संवैधानिक नही माना जबकि दो जजों जस्टिस खेहर और जस्टिस नज़ीर ने तीन तलाक़ को संविधान के अनुकूल माना है. यानि फैसला तीन जजों की राय के मुताबिक ही हुआ. इस तरह तीन तलाक पर छ महीने के लिए रोक लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि नया क़ानून संसद बनाएगी. यह काम कोर्ट नहीं करेगा.

क्या है मामला

मार्च, 2016 में उतराखंड की शायरा बानो नामक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी. बानो ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन कानून 1937 की धारा 2 की संवैधानिकता को चुनौती दी है.

कोर्ट में दाखिल याचिका में शायरा ने कहा है कि मुस्लिम महिलाओं के हाथ बंधे होते हैं और उन पर तलाक की तलवार लटकती रहती है. वहीं पति के पास निर्विवाद रूप से अधिकार होते हैं. यह भेदभाव और असमानता एकतरफा तीन बार तलाक के तौर पर सामने आती है.

- Advertisement -

[wptelegram-join-channel]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles