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बहुमत होने की वजह से लोकसभा में ट्रिपल तलाक को आपराधिक घोषित करने वाले मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 (The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) को मोदी सरकार आज भी राज्यसभा में पास नहीं करवा पाई.

सत्र का आखिरी दिन होने के कारण लोकसभा और राज्‍यसभा की कार्यवाही अनिश्‍चितकाल के लिए स्‍थगित कर दी गई. अब तीन तलाक बिल पर कोई फैसला 30 जनवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र में होगा. सदन में गतिरोध को खत्‍म करने के लिए सभापति ने सरकार और विपक्ष की बैठक बुलाई थी वह भी बेनतीजा रही.

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बैठक में सरकार की तरफ से अरुण जेटली और कांग्रेस के कई वरिष्‍ठ नेता मौजूद थे. इस दौरान विपक्ष फौजदारी अपराध घोषित करने के प्रावधान वाले विधेयक को सेलेक्‍ट कमेटी के पास भेजे जाने की मांग पर अड़ा रहा. लेकिन सरकार ने ऐसा करने से पहले ही मना कर चुकी है.

राज्यसभा में नेता सदन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तत्काल तीन तलाक बिल को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग को इसे लटकाने का प्रयास करार दिया, उनका कहना था कि विपक्ष ने प्रवर समिति के लिए जिन सांसदों को आगे किया है, वे वास्तव में इस बिल को खत्म करना चाहते हैं.

नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद ने जेटली के आरोपों पर कहा कि यह गलत प्रचार फैलाया जा रहा कि कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष तत्काल तीन तलाक बिल के खिलाफ है. हमारी आपत्ति केवल इस पर है कि एकसाथ तीन तलाक पर पति जेल जाएगा, तब उस दौरान पत्नी का गुजारा कौन चलाएगा. हमारा आग्रह है कि गुजारे की व्यवस्था कर दीजिए.

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