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दिल्ली-शामली यात्री ट्रेन में बुधवार अपने घर लौट रहे तीन मुस्लिम मौलवियों के साथ मारपीट कर उत्तर प्रदेश के बागपत के निकट चलती ट्रेन में से फेंक दिया गया था. इन सभी के साथ ये वहशीपन इसलिए किया गया था कि इन लोगों ने टोपी पहन रखी थी.

पीड़ितों में से एक मौलवी गुलजार ने इंडियन एक्सप्रेस को अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि दिल्ली से निकलते समय हमने शामली जाने वाली ट्रेन ली जिसमें सात लोगों ने हमपर हमला किया. ये व्यक्ति हमारे अगले वाले कंपार्टमेंट में बैठे थे. हम अहदा स्टेशन पर उतरने ही वाले थे कि तभी उनमें से एक व्यक्ति ने हमारा रास्ता रोक लिया. उन्होंने ट्रेन की खिड़कियां बंद कर दी और हमारे साथ मारपीट करने लगे. हम लगातार उनसे पूछ रहे थे कि उन्हें हमसे क्या परेशानी है क्योंकि हमें समझ नहीं आ रहा था कि वे हमारे साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं.”

मौलवी ने कहा “जब वे हमारे साथ मारपीट कर रहे थे तो उनमें से एक ने कहा कि टोपी पहनता है? टोपी पहनना हम सिखाएंगे. उस व्यक्ति की बात सुनकर हमें पता चला कि उन्हें हमारे धर्म से परेशानी हो रही थी. ट्रेन आधे मिनट के लिए ही अहदा स्टेशन पर रुकी और आरोपी हमारे साथ मारपीट करते रहे. इसके बाद ट्रेन थोड़ा सा आगे बढ़ी तो आरोपियों ने इमरजेंसी चैन खींच दी और वे ट्रेन से उतरकर सुनहरा गांव की तरफ भाग गए.

गुलजार ने बताया कि ट्रेन में कई यात्री मौजूद थे लेकिन किसी ने भी आगे आकर उनकी मदद नहीं की और वे केवल तमाशबीन बने सब देखते रहे. पीड़ित मौलवी के 20 वर्षीय भतीजे मोहम्मद इसरार ने कहा कि “आरोपियों ने हमें बर्फ की सिल्लियों से मारा. हम नहीं जानते उनका मकसद क्या था लेकिन हमें यह महसूस हुआ था कि उन्हें हमारी टोपी और स्कार्फ से परेशानी हो रही थी.

ध्यान रहे इसरार और गुलजार अहेड़ा गांव के एक मदरसे में बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं. बुधवार को तीनों बागपत से दिल्ली स्थित जामा मस्जिद और हजरत निजामुद्दीन दरगाह देखने गए थे.

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