नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावो के नतीजो से कांग्रेस को बड़ा धक्का पहुंचा है. आजाद भारत के इतिहास में कांग्रेस को कभी भी उत्तर प्रदेश में इतनी कम सीटे नही मिली. इस बार कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. गठबंधन में कांग्रेस को 105 सीटे मिली थी. लेकिन कांग्रेस केवल 7 सीटो पर ही जीत दर्ज कर पायी. ऐसे में कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर की काबिलियत पर सवाल उठना लाजिमी है.

अब उत्तर प्रदेश की हार पर प्रशांत किशोर ने चुप्पी तोड़ी है. दैनिक भास्कर से बात करते हुए उन्होंने कहा की पहले सब कुछ ठीक चल रहा था, हमने खाट सभाए की. उस समय तक मेरी बाते मानी जा रही थी. लेकिन उसके बाद मेरी बाते नही मानी गयी . टॉप मैनेजमेंट ने मुझे सुनना बंद कर दिया. अगर पार्टी मेरी नीतियों पर चुनाव लडती तो परिणाम कुछ और होते.

अपनी बात को सही साबित करने के लिए प्रशांत किशोर ने पंजाब का उदहारण देते हुए कहा की अगर मेरी रणनीति काम नही करती तो कांग्रेस पंजाब में बहुमत हासिल नही करती. वहां मुझे फ्री हैण्ड दिया गया. उन्होंने मुझे खुली छूट दी और मेरी बाते सुनी. और परिणाम सबके सामने है. हालाँकि प्रशांत ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए कहा की अब चूँकि हम हार चुके है इसलिए मैं इस हार की जिम्मेदारी लेता हूँ.

कांग्रेस के बुरे प्रदर्शन के पीछे देरी से हुए गठबंधन को बताते हुए प्रशांत किशोर ने कहा की पहले गठबंधन देर से हुआ जिससे उम्मीदवारों के मन में एक असमंजस की स्थिति बनी रही. फिर करीब 25 सीटो पर दोनों ही पार्टी के उम्मीदवार खड़े हो गए जिससे बीजेपी को फायदा हुआ. क्योकि जब गठबंधन हुआ उस समय पहले फेज का नॉमिनेशन शुरू हो चूका था. इसलिए वोटर के मन में भी संशय बना रहा.

प्रियंका गाँधी के चुनाव प्रचार न करने पर किशोर ने कहा की निश्चित तौर पर अगर वो कैंपेन करती तो काफी फर्क पड़ता लेकिन अब इस बात का क्या फायदा. जो होना था वो हो चूका. मालूम हो की कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और प्रशांत किशोर के बीच शुरू से ही मतभेद थे. उसी बात की कसक प्रशांत किशोर के बयान में दिखायी दी. यह पहला मौका है जब प्रशांत चुनावी रणनीतिकार रहते हुए कोई चुनाव हारे है.

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