evm and vvpat

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नई दिल्ली । पीछले कुछ चुनावों के नतीजों के बाद विपक्षी दलो ने ईवीएम को लेकर सवाल खड़े किए है। विपक्षी दलो का आरोप है की ईवीएम में छेड़छाड़ सम्भव है और इसी वजह से भाजपा लगातार चुनाव जीत रही है। वही आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने तो विधानसभा में ईवीएम जैसी दिखने वाली मशीन को हैक तक करके दिखा दिया। हालाँकि चुनाव आयोग इन सभी आरोपो को कई बार ख़ारिज कर चुका है।

लेकिन यह विपक्षी दलो के आरोपो का ही दबाव था की चुनाव आयोग को ईवीएम के साथ VVPAT मशीनो को लगाना पड़ा। पहले गोवा और अब गुजरात चुनाव के दौरान सभी बूथो पर VVPAT का इस्तेमाल हुआ। फ़िलहाल गुजरात चुनाव के नतीजे आ गए है और भाजपा छठी बार वहाँ सरकार बनाने जा रही है। लेकिन विपक्षी दल इन चुनावो में भी ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगा रहे है।

दरअसल सबसे बड़ी समस्या यह है की चुनाव आयोग ने मतगणना के दौरान VVPAT की पर्चियों की गणना करने से इंकार कर दिया। इसलिए इस अतिरिक्त मशीन के लगाने का कोई फ़ायदा नज़र नही आ रहा। अगर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ सम्भव है और VVPAT की पर्चियों को गणना नही की जाएगी तो लोकतंत्र में विश्वास करने वाले एक आम मतदाता के मन में हमेशा सवाल उठते रहेंगे।

लेकिन सवाल फिर वही है की आख़िर चुनाव आयोग ऐसा क्या करे की जिससे मतदाता का ईवीएम पर विश्वास बना रहे। अगर हम यह कहे की हमें वापिस बैलेट पेपर पर चला जाना चाहिए तो वह भी सही नही है। फिर ऐसा क्या किया जाए की चुनाव में पारदर्शिता भी बनी रहे, तकनीक का भी इस्तेमाल होता रहे और मतदाता भी संतुष्ट हो जाए। इसका केवल एक ही हल है और इसको लेकर तमाम राजनीतिक दलो को आवाज़ उठानी चाहिए।

दरअसल ईवीएम के ज़रिए मत ख़राब नही होते और वोटिंग भी जल्दी होती है। इसलिए मतदान ईवीएम के ज़रिए कराए जा सकते है। ईवीएम के साथ साथ सभी बूथो पर VVPAT लगाए जाए जिससे की मतदाता को यह पता चल सके की उसने अपना मत किस दल को दिया है। यह अभी तक होता आया है और चुनाव आयोग भी किसी दूसरे विकल्प पर नही जाना चाहता।

इसलिए इसी विकल्प के साथ जाकर भी हम मतदाताओं की लोकतंत्र में विश्वास बहाली कर सकते है और वो भी बिना किसी अतिरिक्त पैसा ख़र्च किए। दरअसल मतगणना के समय ईवीएम की जगह VVPAT की पर्चियों की गणना की ज्याएँ। चूँकि सभी मतदाता पहले ही VVPAT के ज़रिए यह पता कर चुके है की उन्होंने किस उम्मीदवार को वोट दिया है इसलिए अगर उन पर्चियों की गणना होगी तो मतदाता को भी यह यक़ीन होगा की उसके ही मतों की गणना की जा रही है। इसलिए विपक्षी दल समेत उन सभी लोगों को जिनको ईवीएम पर यक़ीन नही है उन्हें यह माँग चुनाव आयोग के सामने रखनी चाहिए।

प्रशांत चौधरी 

नोट: उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार है।

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