जबलपुर | कहते है की मज़बूरी इंसान से क्या क्या नही करा लेती. मज़बूरी में इंसान ऐसे काम करने के लिए भी तैयार हो जाता है जिसकी वो कभी कल्पना भी नहीं कर पाता. एक ऐसी ही मज़बूरी दिखी मध्य प्रदेश के जबलुपुर में. यहाँ एक एक अस्पताल में दो लड़की अपना खून बेचने आई थी. लेकिन अंतिम समय में एक समाजसेवी की वजह से वो ऐसा करने से बच गयी.

दरअसल गुरुवार को जबलपुर के एक अस्पताल में दो लडकिया ब्लड बैंक का पता पूछ रही थी. वहां मौजूद कुछ लोगो ने उन्हें ब्लड बैंक का रास्ता भी दिखा दिया. किसी के पूछने पर उन्होंने बताया की वो यहाँ अपना खून बेचने आई है. उन्हें कुछ पैसो की जरुरत है जिसकी एवज में वो अपना खून बेचना चाहती है. इससे पहले की वो अपना खून बेच पाती, इस बात की भनक वहां के समाजसेवी आशीष ठाकुर को लग गयी.

वो तुरंत अस्पताल पहुंचा और दोनों लडकियों की मदद की. 15 और 16 वर्षीय दोनों लडकिया , गंगानगर स्थित रानी दुर्गावती गर्ल्स हॉस्टल में रहती है. लडकियों ने आशीष को बताया की कुछ दिन पहले एक छात्रा ने हॉस्टल वार्डेन के 52 हजार रूपए चुरा लिए. इस बात का पता चलने पर बाकी छात्राओं ने उस लड़की के परिजनों को हॉस्टल बुलाया और घर भेज दिया.

लडकियों के अनुसार , जैसे ही यह बात हॉस्टल वार्डेन वैदेही ठाकुर को पता चली , उन्होंने सभी लडकियों से 52 हजार रूपए का इंतजाम करने का आदेश दे दिया. लडकियों ने बताया की वार्डेन ने धमकी दी है की अगर 24 घंटे में पैसे नही मिले तो हॉस्टल से बाहर निकाल दी जाओगी. ऐसे में लडकियों ने दो दो हजार रूपए अपनी स्कॉलरशिप से निकालकर दिए. बाकी रकम के लिए उन्होंने खून बेचने का फैसला किया. इस घटना के बाद आशीष ठाकुर लडकियों को लेकर थाने पहुंचे और हॉस्टल वार्डेन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.


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