अमेरिका की मशहूर राजनीतिक पत्रिका ‘टाइम’ ने  एक बार फिर दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची जारी की है। जिसमे पीएम मोदी को भी फिर से शामिल किया गया है। लेकिन उनकी तीखी आलोचना की गई है।  इस सूची में शामिल गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, अभिनेता आयुष्‍मान खुराना, एचआईवी पर शोध करने वाले रविंदर गुप्‍ता और शाहीन बाग धरने में शामिल बिल्किस भी शामिल हैं।

टाइम मैगजीन ने पीएम मोदी को लिस्ट में जगह देते हुए लेख में लिखा, “लोकतंत्र की विशेषता इमें होने वाले स्वतंत्र चुनाव नहीं हैं। वे तो सिर्फ ये बताते हैं कि किसे ज्यादा वोट मिले। ज्यादा अहम उन लोगों के अधिकार हैं, जिन्होंने जीतने वाले के पक्ष में वोटिंग नहीं की। भारत पिछले सात दशकों से दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां की 1.3 अरब लोगों की आबादी में इसाई, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, जैन और कई अन्य धर्म के लोग रहते हैं। सभी भारत में स्वीकार्य रहे हैं, जिसकी दलाई लामा (जिन्होंने भारत में ही निर्वासित रहते हुए अपनी ज्यादातर जिंदगी बिताई) भी शांति और स्थायित्व का उदाहरण बताते हुए तारीफ करते हैं।”

इसके साथ ही ये भी कहा गया कि  “नरेंद्र मोदी ने इन सबको शक के दायरे में ला दिया है। भारत के लगभग सभी प्रधानमंत्री 80 फीसदी हिंदू आबादी से ही रहे हैं, लेकिन सिर्फ मोदी ने ही इस तरह से शासन किया है, जैसे कोई और मायने नहीं रखता। पहले उनका चुनाव सशक्तीकरण जैसे लोकप्रिय वादे पर हुआ, उनकी हिंदू-राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी ने न सिर्फ उत्कृष्टता, बल्कि विशेष तौर पर भारत के मुस्लिमों को निशाना बनाकर बहुसंख्यकवाद को भी अस्वीकृत कर दिया।”

इससे पहले मई 2019 में टाइम मैगजीन ने पीएम मोदी को कवर पेज पर रखते हुए ‘भारत का डिवाइडर इन चीफ’ बताया था। इस आर्टिकल को पत्रकार तवलीन सिंह और पाकिस्तानी नेता व कारोबारी सलमान तासीर के बेटे आतिश तासीर ने लिखा था।

हालांकि टाइम ने नतीजों के बाद उन पर एक और आर्टिकल छापा था। दूसरे आर्टिकल का शीर्षक था- ‘मोदी हैज यूनाइटेड इंडिया लाइक नो प्राइम मिनिस्टर इन डेकेड्स’ यानी ‘मोदी ने भारत को इस तरह एकजुट किया है जितना दशकों में किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया’। इस आर्टिकल को मनोज लडवा ने लिखा था।

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