बाल गंगाधर तिलक पर फिल्म निर्माण के लिए दिये गये 2.5 करोड़ रपये के अनुदान के अनुदान के गबन का मामला सामने आया हैं. इसके साथ ही अनुदान से जुड़ी फाइलें सरकार के रिकार्ड से गायब भी कर दी गई. यह खुलासा कंेंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में सुनवाई के दौरान हुआ

इस बात का खुलासा आरटीआई आवदेन के बाद हुआ. दरअसल, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बाल गंगाधर तिलक पर फिल्म के निर्माण के वास्ते विनय धूमले के लिए 2.5 करोड़ रु दिए थे. इस फिल्म को 2005 में मंजूरी दी गयी थी. लेकिन यह फिल्म आज तक नहीं बनी.

इस बारें में वी आर कमलापुरकार ने आरटीआई के जरिए संस्कृति मंत्रालय से तिलक पर बनी इस फिल्म से जुड़े रिकार्ड की मांग की थी. जिसके बाद मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि निर्माता धूमले को यह फिल्म बनाने के लिए 2.5 करोड़ रपये दिए गए थे लेकिन यह कभी बनी ही नहीं.

उपसचिव निर्मला गोयल ने कहा कि मंत्रालय को इस गबन का तब जाकर पता चला जब 2011 में कमालपुरकार ने आरटीआई आवेदन दिया. उन्होंने कहा, दो किश्तों में विनय को पैसे दिए गए. लेकिन यह फिल्म कभी बनी ही नहीं और इस धन के उपयोग की कभी जांच नहीं हुई.

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने गायब फाइलों की जांच करने और आदेश प्राप्त होने के 60 दिन के भीतर कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट सौंपने का आदेश संस्कृति मंत्रालय को दिया है. सुनवाई के दौरान मंत्रालय के केंद्रीय जनसूचना अधिकारी (अवर सचिव) अर्नब ऐच ने कहा कि यह मामला जांच के लिए सीबीआई के पास भेजा गया है लेकिन अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है.

उन्होंने आयोग से कहा,इस फिल्म की परियोजना के ब्योरे, उसकी मंजूरी, मौद्रिक विनिमय में शामिल रहेे अधिकारियों से जुड़ी फाइलों का पिछले कोम्मेमोरेशन ब्यूरो के रिकार्ड रूम में पता नहीं चल रहा है. उन्होंने कहा कि 2013 और 2017 के बीच रिकार्ड रूम को खंगाला गया लेकिन व्यर्थ रहा और फाइल को लापता बता दिया गया

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