संसद में ‘तीन तलाक’ बिल को पास कराने में नाकाम रही नरेंद्र मोदी सरकार ने एक बार फिर से तीन तलाक अध्‍यादेश को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की बैठक में अध्‍यादेश पर फैसला लिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में पीएम आवास पर हुई बैठक में इसे मंजूरी दी गई. यह अध्‍यादेश दूसरी बार लाया गया है. इससे जुड़ा बिल राज्‍य सभा में पेंडिंग है, लेकिन अब संसद सत्र लोकसभा चुनावों के बाद ही होगा.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि कैबिनेट ने तीन तलाक पर अध्यादेश को मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पहले हस्ताक्षरित यह अध्यादेश पिछले लगभग एक साल में तीसरी बार प्रभावी हो रहा है. आगामी चुनाव से पहले इस बिल पर अध्यादेश लाने के कदम को मुस्लिम महिला मतदाताओं को एनडीए की ओर गोलबंद करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

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अध्‍यादेश के तहत एक बार में तीन तलाक देना गैरकानूनी और अमान्य होगा और ऐसा करने वाले को तीन साल तक की सजा हो सकती है. यह अपराध तब संज्ञेय होगा, जब विवाहित मुस्लिम महिला या फिर उसका करीबी रिश्तेदार उस व्यक्ति के खिलाफ सूचना देगा, जिसने तत्काल तीन तलाक दिया है.

बता दें पिछले साल दिसंबर में तीन तलाक बिल (2018) को लोकसभा ने पारित कर दिया था. इस बिल को लेकर सदन में लंबी बहस हुई थी. विपक्ष की मांग है कि मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2018 को सेलेक्ट कमिटी को भेजा जाए. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने भी तीन तलाक से संबंधित विधेयक के महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है.

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