सूचना के अधिकार ऐक्ट के तहत मिली जानकारी से ईवीएम चोरी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. जिसको लेकर बवाल मचना लाजमी है. साथ ही ईवीएम की सुरक्षा को लेकर फिर से सवाल खड़े हो गए. RTI के तहत चुनाव आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, तीन राज्यों- छत्तीसगढ़, गुजरात और मध्य प्रदेश में पिछले चुनावों में ईवीएम चोरी के कम से कम 70 मामले हुए हैं. जिनमे हजारो ईवीएम चोरी हुई है.

इस खुलासे के बाद चुनाव आयोग के उस दावे की भी पोल खुल गई जिसमें कहा गया था कि इवीएम कड़ी सुरक्षा के पहरे मेंहै और इन तक चुनाव आयोग के अधिकारियों के अलावा किसी की पहुँच नहीं. हालांकि, चुनाव आयोग ने इन सभी आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि वह ईवीएम की निगरानी के लिए कड़े प्रोटोकॉल का पालन करता है और इन मशीनों को लूटे जाने की स्थिति में इन्हें कबाड़ में डाल दिया जाता है और इनका दोबारा इस्तेमाल नहीं होता.

चुनाव आयोग के उप आयुक्त सुदीप जैन ने बताया, ‘गुजरात को छोड़कर ये मामले चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों से लूट के हैं, चोरी के नहीं. नक्सलियों और असामाजिक तत्वों की ओर से चुनाव प्रक्रिया में रुकावट पैदा करने के लिए ईवीएम को लूटा गया था. ऐसे सभी मामलों में कानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है. हालांकि, इन मामलों से चुनाव के दौरान और अन्य समय पर ईवीएम/VVPAT को सुरक्षित रखने और उनके उपयोग को लेकर किए जाने वाले कड़े प्रशासनिक और सुरक्षा उपायों पर कोई संदेह पैदा नहीं होता.’

इस बारें में ऐक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने कहा, ‘चुनाव आयोग अपना रुख लगातार बदलता रहा है जिससे सिविल सोसायटी और राजनीतिक दलों का शक बढ़ा है. पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि ईवीएम को हैक नहीं किया जा सकता और आयोग ने इसे साबित करने के लिए हैकॉथन आयोजित करने का वादा किया था, जिसे उन्होंने बदलकर ईवीएम का एक सरकारी प्रदर्शन कर दिया.

उन्होंने कहा, जब हमने ईवीएम को हैक करने की चुनौती स्वीकार की तो चुनाव आयोग ने एक बार फिर अपना रुख बदलते हुए कहा कि ईवीएम तक पहुंचा नहीं जा सकता. अब RTI से साबित हुआ है कि ईवीएम लगातार चोरी होती रही हैं. इसका यह भी मतलब है कि रिवर्स इंजिनियरिंग से सोर्स कोड हासिल कर नतीजों को बदला जा सकता है.

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