नई दिल्ली | अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद पुरे देश में इसको लेकर चर्चा चल रही है. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से बातचीत के जरिये इस मामले को सुलझाने के लिए कहा है. लेकिन बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट के सुझाव को ठुकराते हुए कहा की अदालत के बाहर हमें कोई भी समझौता मंजूर नही है, अदालत जो भी फैसला देगी वो हमें मंजूर होगा.

बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के रुख को देखते हुए बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा की या तो मुस्लिम संगठन सरयू नदी के पार मस्जिद बनाने के उनके प्रस्ताव को मान ले या फिर हम 2018 में कानून बनाकर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रसस्त कर देंगे. स्वामी के बयान के बाद मोमिन कांफ्रेंस के पुर राष्ट्रिय अध्यक्ष डॉ अब्दुल अंसारी ने भी प्रतिक्रिया दी है.

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उन्होंने न्यूज़ 18 से बात करते हुए कहा की सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमती से अयोध्या विवाद सुलझाने की सलाह दी है लेकिन पहले की सरकारों ने करीब 7 बार बातचीत के जरिये इस मामले को सुलझाने की कोशिश लेकिन सब विफल रहे. जब तक राम मंदिर से जुड़े पक्ष के लोग किसी बात पर सहमत नही होंगे तब तक समझौता मुश्किल है. उन्होंने कहा की चूँकि राम मंदिर पक्ष इस बात पर अडा हुआ है की मस्जिद का निर्माण कही और किया जाए तो समाधान कैसे निकल सकता है.

अंसारी ने बाबरी मस्जिद पक्ष से सवाल पूछते हुए कहा की क्या वो बाबरी मस्जिद का वो स्थान को छोड़ने पर राजी होंगे जहाँ अभी पूजा हो रही है? इसलिए मैं कह रहा हूँ की बातचीत से यह मसला हल नही होगा. अदालत सबूत के आधार पर अपना फैसला दे. इसके बाद ही अयोध्या विवाद का हल निकल सकता है.

अंसारी ने स्वामी पर कटाक्ष करते हुए कहा की उन्होंने अदालत को यह नही बताया की पहले भी बातचीत के जरिये इस मामले को सुलझाने की कोशिश हो चुकी है. मैं कहना चाहता हूँ की बातचीत से पहले उन लोगो को सजा दी जाए जिन्होंने बाबरी मस्जिद को शहीद किया. जिसकी वजह से देश में दंगे हुए और काफी जान माल की हानि हुई. पहले उन लोगो को सजा हो इसके बाद बातचीत.

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