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जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में लागू विवादास्पद सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) को हटाने को लेकर आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कहा कि ये समय ठीक नहीं है.

घाटी के मौजूदा हालात का हवाला देते हुए आर्मी चीफ ने कहा, अभी वह समय नहीं आया है, जब अफस्पा पर दोबारा विचार किया जा जाए या इसके प्रावधानों को हल्का बनाया जाए. उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर जैसे तनावपूर्ण क्षेत्रों में तैनाती के दौरान सेना काफी सावधानी बरत रही है जिससे मानवाधिकारों की रक्षा की जा सके.

उन्होंने कहा, यद्यपि अफस्पा में कुछ कड़े प्रावधान हैं पर सेना अतिरिक्त नुकसान को लेकर चिंतित रहती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि ऑपरेशंस कानून के तहत हों और स्थानीय लोगों को असुविधा न हो. आर्मी चीफ ने आगे कहा, ‘अफस्पा के तहत जितनी सख्ती बरती जा सकती है, वैसा हमने कभी नहीं किया.

ध्यान रहे राज्य की महबूबा सरकार घाटी से अफस्पा को हटाने की मांग करती आई है. हाल ही में खबर आई थी कि अफस्पा को हटाने की जरूरत या कम से कम कुछ प्रावधानों को हल्का करने’ पर रक्षा और गृह मंत्रालयों में कई दौर की उच्च-स्तरीय वार्ता हो चुकी है.

सेना की और से मानवाधिकार हनन को लेकर रावत ने कहा कि हर स्तर पर कई ऑपरेशंस के लिए सेना के अपने नियम होते हैं, जिससे अफस्पा के तहत लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो. उन्होंने कहा कि मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि हमारी सेना का काफी अच्छा मानवाधिकार रेकॉर्ड रहा है.

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