Monday, September 20, 2021

 

 

 

CRPF अटैक – एक लम्बी चलने वाली लड़ाई का हुआ है आरम्भ

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पुलवामा अटैक के बाद से जहाँ एक तरफ देश स्तब्ध है वहीँ सभी लोग एक स्वर में आतंक के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग कर रहे है. सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया तक पुलवामा अटैक को लेकर रोष साफ़ नज़र आ रहा है.

ऐसे में विशेषज्ञों की राय भी इस मामले में एकमत नज़र आ रहे है, चूँकि हम जानते हैं की भारत के नागरिक जज्बाती है इसीलिए तुरंत बदले की बात उठनी शुरू हो गयी लेकिन विशेषज्ञों का मानना है की यह ऐसी लड़ाई नहीं है की हमने सर्जिकल स्ट्राइक किया और लड़ाई का अतं वही हो जायेगा. यह एक लम्बी चलने वाली लड़ाई की शुरुआत हो चुकी है.

बीबीसी पर प्रकाशित खबर के अनुसार पूर्व पुलिस महानिदेशक एम.एम. खजूरिया ने कहा है की इस लड़ाई को यह नहीं समझना चाहिए की बस एक-दो महीने में समाप्त हो जाएगी, यह एक लम्बा संघर्ष है. खजूरिया का मानना है की इस हमले की सबसे अहम् बात यह थी की, इसमें शामिल आत्मघाती हमलावर स्थानीय था जो की वहाबी विचारधारा के कारण आईएसआईएस से जुड़ रहे हैं. जिस कारण भारत सरकार को इस बात पर ध्यान देना चाहिए की सिर्फ वहाबी विचारधारा भी एक बड़ा फैक्टर है और इसका समाधान खोजना चाहिए.

वहीँ दूसरी तरफ सरकार को नसीहत देते हुए कहा की यह भी देखना चाहिए की लोग क्यों नाराज़ है और ये भी महत्वपूर्ण है कि हम उन लोगों के बारे में सोचें जो कि कश्मीर में आतंकवाद के संपर्क में नहीं आए हैं. इस मामले में राजनीति करना हमारे देश के लिए ठीक नहीं है. हमें लोगों से संवाद करना होगा.”

बीबीसी अपनी रिपोर्ट में पूर्व डीजीपी और वर्तमान में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर एसपी वैद के विचार लिखते हुए एक बार फिर  एक्सट्रीम इस्लामिक विचारधारा को इस हमले का ज़िम्मेदार बनाता है. एसपी वैद कहते हैं “मुझे लगता है कि मैंने पहली बार इस तरह का आत्मघाती हमला देखा है जिसमें किसी काफ़िले को इस तरीके से निशाना बनाया गया है. हमलावर स्थानीय लड़का था. ये बहुत ख़तरनाक संकेत हैं. इसकी जांच होनी चाहिए कि ये क्यों और कैसे हुआ. यह जैश, लश्कर और उनकी जैसी सोच रखने वाले संगठनों की पैन-इस्लामिक विचारधारा है जिसने मासूम कश्मीरी को आत्मघाती हमलावर बना दिया.”

जब उनसे पूछा गया कि चुनाव नज़दीक हैं, ऐसे में क्या इस तरह के हमलों से कश्मीर में तैनात सैनिकों के मनोबल पर असर पड़ेगा, तो वैद ने इसका जवाब न में दिया.

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा. पहले भी चरमपंथियों ने हमले किए हैं और यह सिलसिला जारी है.”

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