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अयोध्या । पीछले क़रीब 7 दशकों से अयोध्या विवाद को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। चूँकि अब यह मामला सप्रीम कोर्ट में है इसलिए उम्मीद है की जल्द ही इस पर फ़ैसला आ जाएगा। सप्रीम कोर्ट में आज से इस विवाद को लेकर निर्णायक सुनवाई शुरू हो चुकी है। चूँकि यह मामला बेहद संवेदनशील है इसलिए कोर्ट भी कोई कोताही नही बरतना चाहता। इस विवाद से जुड़ी जानकारी पब्लिक फ़ोरम में है लेकिन अभी भी कुछ अनसुनी बातें बाहर नही आयी है।

एक ऐसी ही अनसुनी बात से हम आपको रूबरू कराने जा रहे है। दरअसल अधिकतर लोगों का मानना है की मुस्लिम विवादित ज़मीन पर बाबरी मस्जिद के पक्षकार है लेकिन यह बात शायद बहुत काम लोग जानते है कि पीछले दो दशकों से तीन मुस्लिम ही रामलला की सेवा में लगे हुए है। क़रीब दो दशकों से रामलला के कपड़ों से लेकर उनकी सुरक्षा तक का ज़िम्मा तीन मुस्लिम सम्भाल रहे है।

टाइम्स ओफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अब्दुल वाहिद, सादिक़ अली और महबूब तीनो कई वर्षों से राम लला की सेवा कर रहे है। अब्दुल वाहिद मंदिर की सुरक्षा और चाक चौबंद की ज़िम्मेदारी सम्भालते है। जब भी किसी वजह से मंदिर के आस पास के कंटीले तार टूट जाते है तो पीडब्ल्यूडी विभाग अब्दुल वाहिद को इनको ठीक करने के लिए बुलाते है। इसके लिए उन्हें रोज़ाना 250 रुपए मिलते है।

उधर रामलला के कपड़े सिलने की ज़िम्मेदारी सादिक़ अली को दी गयी है। वह पीछले दो दशकों से इस ज़िम्मेदारी को बख़ूबी निभा रहे है। वो बताते है की हनुमान गढ़ी में पीछले 50 सालों से हमारी ‘बाबू टेलर्स’ के नाम से दुकान है। हम राम जन्मभूमि मंदिर के पुरोहित कि भी कपड़े सिलते है। लेकिन सबसे ज़्यादा संतुष्टि रामलला के कपडे सिलकर ही मिलती है। वो कहते है की ईश्वर सबके लिए एक है। वही महबूब अयोध्या के ज़्यादातर मंदिरो में 24 घंटे बिजली की व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते हैं।

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