meerut

meerut

मेरठ । हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुए नगर निगम के चुनावों में भाजपा ने ज़बरदस्त जीत हासिल की। भाजपा ने 16 मेयर पदों में से 14 जगहों पर जीत हासिल की। लेकिन मेरठ नगर निगम में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। यह नगर निगम पीछले एक साल से काफ़ी विवादों में रही है। ख़ासकर राष्ट्रगीत ‘वंदेमातरम’ को लेकर पूर्व मेयर हरीकान्त आहलूवालिया के एक आदेश ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया था।

हरीकान्त ने नगर निगम की बोर्ड बैठकों में वंदेमातरम गाना अनिवार्य कर दिया था। यही नही उन्होंने वंदेमातरम नही गाने वाले पार्षदों की सदस्यता ख़त्म करने तक की चेतावनी दे दी थी। इस बारे में उन्होंने सदन में एक प्रस्ताव भी पास किया। उस दौरान विपक्षी दलो और कुछ मुस्लिम पार्षदों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और मेयर के इस आदेश को मनमाना क़रार दिया।

अब चूँकि मेरठ नगर निगम पर बीएसपी का क़ब्ज़ा हो चुका है इसलिए सबकी निगाहे इस बात पर टिकी थी की नयी मेयर सुनिता वर्मा, राष्ट्रगीत वाले प्रस्ताव पर क्या रख अपनाती है। लेकिन यह स्पष्ट था कि वह इस आदेश को ख़ारिज कर देगी। और हुआ भी कुछ ऐसा ही। उन्होंने साफ़ कर दिया की नगर निगम की बोर्ड बैठक में राष्ट्रगीत का गान नही कराया जाएगा।

हालाँकि राष्ट्र्गान पर उनका कहना था की परंपरा के अनुसार राष्ट्र्गान का गान होता रहेगा, हम संविधान का पालन करेंगे। मालूम हो कि मेरठ के बाद कई नगर निगमो में इस तरह के आदेश जारी किए गए थे। राजस्थान की राजधानी जयपुर के निगम निगम में कर्मचारियों के लिए वंदेमातरम गाना अनिवार्य कर दिया गया था। इस बारे में मेयर का कहना था की इससे निगम के कर्मचारियों में देशभक्ति की भावना जागृत होगी।

Loading...

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें