Thursday, January 20, 2022

फोन टैंपिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा – क्या देश में किसी के लिए निजता नहीं बची

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सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता और उनके परिवार के सदस्यों के फोन टैप कराने की छत्तीसगढ़ सरकार की कार्रवाई पर सोमवार को कड़ा रुख अपनाया. कोर्ट ने कहा कि किसी के लिये भी निजता नहीं बची है.

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि क्या किसी के लिए कोई निजता नहीं बची है. मैं यह जानना चाहता हूं कि आखिर किसके कहने पर ये टैपिंग कराई गई? कोर्ट ने सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब भी मांगा है.

पीठ ने शीर्ष अदालत में आईपीएस अधिकारी का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता के खिलाफ अलग से प्राथमिकी दायर किये जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की और अधिवक्ता के खिलाफ जांच पर रोक लगा दी.

पीठ ने कहा कि इस मामले में अगले आदेश तक कोई दण्डात्मक कदम नहीं उठाया जायेगा. पीठ ने आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी से कहा कि इस मामले में छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम घसीट कर इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाये.

बता दें कि वित्तीय विवाद और अवैध फोन टैपिंग के आरोपों का सामना करने वाले छत्तीसगढ़ के  पुलिस अधिकारी ने राज्य पुलिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है जिसमें वर्तमान राजनीतिक नेताओं के इशारे पर शिकार और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है.

मुकेश गुप्ता, जो बीजेपी सरकार में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के पुलिस महानिदेशक और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के  मुखिया थे, उन्हें इस साल सितंबर में हटा दिया गया था गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य पुलिस दो बेटियों सहित पूरे परिवार के अवैध रूप से फोन टैप कर रही है.

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