इटावा | अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कब्रिस्तान और शमशान की बात उठाकर प्रदेश की राजनीती को संप्रदायिक रंग देने की कोशिश की थी. उनका कहना था की अखिलेश सरकार ने प्रदेश के कब्रिस्तानो की चारदीवारी करने के आदेश दिए है लेकिन यही सलूक शमसान के साथ नही किया जा रहा. लेकिन अब यूपी में बीजेपी की सरकार है इसलिए फ़िलहाल कब्रिस्तान और शमसान की बात करने वाला कोई नही है.

लेकिन इटावा जिले में बसे चकरगनर को फ़िलहाल एक अदद कब्रिस्तान की बहुत जरुरत है. हालात यहाँ तक आ पहुंचे है की लोगो को अपने मृत परिजनों को घर के अन्दर ही दफनाना पड़ रहा है. कुछ घर तो ऐसे है जहाँ एक तरफ कब्र है तो दूसरी तरह उनका सोने का बिस्तर. इन लोगो का कहना है की हमें सरकार से धन , दौलत कुछ नही चाहिए बस हमारे मृत परिजनों को दफनाने के लिए दो गज जमीन दे दीजिये.

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दरअसल चकरगनर में एक बस्ती है तकिया. इस बस्ती में करीब 80 मुस्लिम परिवारों के घर है. ये सभी मजदूर लोग है इसलिए घर का मतलब भी एक या दो कमरे ही है. जिन जमीनों पर ये घर बने हुए है वो भी ग्राम समाज ने इनके पुरखो को दी थी. परिवार बढ़ा तो घर छोटे होते चले गए. लेकिन इनकी समस्या घर नही है. समस्या है कब्रिस्तान. यहाँ कही पर भी कोई कब्रिस्तान नही है. इसलिए अगर किसी के परिजन की मौत भी हो जाती है तो उसे घर में ही दफनाना पड़ता है.

यहाँ की रहने वाली सुशीला बेगम के अनुसार कुछ घर के हालात तो इतने बुरे है की एक तरह कब्र है तो दूसरी तरह सोने के लिए बिस्तर लगा हुआ है. ऐसा नही है की यह समस्या अभी पैदा हुआ है. यह समस्या सालो से चली आ रही है और प्रशासन को भी इस बारे में जानकारी है. लेकिन अभी तक इसका कोई हल नही निकला है. प्रशासन का कहना है हम आस पास के इलाके में जमीन की तलाश कर रहे है. उधर यही के रहने वाले यासीन का कहना है की वो हर दर पर गुहार लगा चुके है लेकिन ठोकरो के अलावा कुछ नसीब नही हुआ.

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