medal

देश की सीमाओं की हिफाजत करने वाली भारतीय सेना के पास अपने जवानों को देने के लिए मैडल भी नहीं हैं. इस समस्या से निपटने के लिए सेना बाजार में मिल रहे नकली मेडल्स का सहारा ले रही हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्रालय के अधीन मेडल विभाग हैं जो सभी प्रकार के मैडल जारी करता हैं लेकिन पिछले 7-8 साल से इस विभाग ने शौर्य के लिए दिए जाने वाले मेडल्स के अलावा कोई मैडल जारी नहीं किया हैं. जिसके कारण सेना को बाजार से नकली मैडल खरीदना पड़ रहा हैं.

वरिष्ठ आर्मी अफसर के अनुसार, जवानों को सम्मानित करने में दिए जाने वाले शौर्य मेडल्स हैं, लेकिन समस्या बाकी मेडल्स में है क्योंकि सर्विस में एक तय समय पूरा करने के बाद जवानों को मेडल्स देने होते हैं. असली और नकली मेडल में फर्क इतना है कि असली मेडल में जवान का नाम और नंबर उस पर अंकित होता है जबकि नकली पर एेसा नहीं होता.

आर्मी अफसर के अनुसार, इस बारे में कई बार डिपार्टमेंट को खत लिखा जा चुका है, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई. ऐसे में सवाल उठता हैं कि जब इस काम के लिए एक पूरा विभाग मौजूद है तो जवानों को दिल्ली कैंट के गोपीनाथ बाजार से खरीदे हुए नकली मेडल्स क्यों पहनने पड़ रहे हैं?


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