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धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगने को गैरकानूनी करार देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपाल स्वामी संभावना जाहिर करते हुए कहा कि अपने नामों में धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल करने वाली पार्टियों को अब नाम भी बदलना पड़ सकता हैं.

स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आखिर यह फैसला लागू कैसे होगा. उन्होंने कहा कि धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल करने वाली पार्टियों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना से बचने के लिए नाम बदलना होगा.

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स्वामी ने कुछ राजनितिक पार्टियों के नाम गिनाते हुए कहा कि अकाली दल, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमिन (एआईएमआईएम), शिवसेना और मुस्लिम लीग को फैसले के बाद अपने नाम बदलने पड़ेंगे. स्वामी के इस कथन का पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने भी समर्थन किया हैं.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का शिवसेना, मुस्लिम लीग जैसी पार्टियों ने विरोध करना भी शुरू कर दिया हैं.  शिवसेना की प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा है कि उनकी पार्टी फैसले का विरोध करेगी. शिवसेना नाम छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखा गया है, कोई भी इसे बदलने के लिए दबाव नहीं डाल सकता. वहीँ मुस्लिम लीग के नेता पीवी अब्दुल वहाब ने कहा कि कोर्ट को इस मामले में ठीक से क्लीयर करना चाहिए.

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