सुप्रीम कोर्ट ने आरजेडी के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को तगड़ा झटका देते हुए एक सप्ताह के भीतर बिहार की सिवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल लाने का आदेश दिया हैं. साथ ही कहा कि इस दौरान शहाबुद्दीन को कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिलेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संविधान का राइट टू फेयर ट्रायल सिर्फ आरोपी के लिए नहीं बल्कि पीड़ित के लिए है. यहां सिर्फ सवाल आरोपी के अधिकारों का नहीं है बल्कि पीडितों के स्वतंत्रता से जीवन जीने के अधिकार का भी है. आरोपी शहाबुद्दीन की इस दलील से कोर्ट सहमत नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट को किसी को दूसरे राज्य में जेल ट्रांसफर नहीं कर सकता. सुप्रीम कोर्ट की ये जिम्मेदारी है कि वो हर केस में फ्री एंड फेयर ट्रायल को सुनिश्चित करे. कोर्ट हर मामले के तथ्यों को देखकर और जनता के हित को ध्यान में रखकर ये फैसला कर सकता है कि फेयर ट्रायल हो.

सीवान के चंद्रकेश्वर प्रसाद और आशा रंजन ने राजद नेता को सीवान जेल से स्थानांतरित किए जाने की याचिकाएं दायर की थीं. प्रसाद के तीन बेटे दो अलग अलग घटनाओं में मारे गए थे और आशा के पति राजदेव रंजन की सीवान में हत्या हो गई थी. याचिकाकतार्ओं ने न्यायालय से अनुरोध किया था कि शहाबुद्दीन के खिलाफ लंबित मामलों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सुनवाई के लिए उन्हें सीवान जेल से राज्य के बाहर किसी अन्य जेल में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए.

इससे पहले बिहार सरकार ने न्यायालय को बताया था कि वह शहाबुद्दीन को सीवान जेल से यहां तिहाड़ जेल स्थानांतरित करने के खिलाफ नहीं है. राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि शहाबुद्दीन क्षारखंड में एक मामले समेत 45 मामलों में सुनवाई का सामना कर रहे हैं.


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