उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने शनिवार को आयोजित किए गए पंजाब यूनिवर्सिटी के 66वें दीक्षांत समारोह में मोदी सरकार को इशारों में निशाने पर लेते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार सभी को है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध-प्रदर्शन भी जायज है.

अपने सम्बोधन में उन्होंने विश्वविद्यालयों के बिगड़ते माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि हमारे विश्वविद्यालयों की आजादी को संकीर्ण सोच के आधार पर चुनौती दी जा रही है, और कुछ लोग इस संकीर्ण सोच को देश के व्यापक हित में बता रहे हैं. उन्होंने इशारों में हाल ही में दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुई हिंसक घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त की.

उन्होंने कहा, ‘विश्वविद्यालयों को दबाव  मुक्त क्षेत्र, स्वतंत्र और ज्ञान समालोचनात्मक स्रोत के रुप में पोषित करने की जरुरत है.’ ताकि सामाजिक गतिशीलता और समानता का मार्ग प्रशस्त हो सके. उपराष्ट्रपति ने देश के संविधान और लोकतंत्र का हवाला देते हुए कहा कि असहमति और आंदोलन के अधिकार तो हमारे संविधान के मौलिक अधिकारों में अंतर्निहित हैं जो कि भारत जैसे विविधता पूर्ण देश को संकीर्ण समुदायिक, वैचारिक या धार्मिक मानदंडों पर परिभाषित करने से रोकते हैं.

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उन्होंने आगे कहा कि किसी गैरकानूनी आचरण या हिंसा के अलावा अन्य किसी भी परिस्थिति में एक विश्वविद्यालय को खामोश नहीं रहना चाहिए न ही उसके शिक्षकों या छात्रों को किसी दृष्टिकोण विशेष का समर्थन या खंडन करने के लिए प्रभावित करना चाहिए. बल्कि विश्वविद्यालयों को अपनी सैद्धांतिक अखंडता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हर कानूनी तरीका अपनाना चाहिए.

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