क्या मुसलमान देशभक्त नहीं हो सकता ? ये एक सवाल हैं जो भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी से किया जा रहा हैं. ये सवाल देश की हिफाजत करने वाला एक मुस्लिम सैनिक कर रहा हैं. जिसे अब अपनी हिफाजत के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा हैं.

इस जवान का नाम इरफान अहमद हैं जो अपने ही सीनियर अधिकारियों से अपनी जान को बचाए फिर रहा हैं. मिर्जापुर के कोलउंड गांव के रहने वाले इरफ़ान ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध तस्करी का खुलासा किया था. जिसके बाद से ही उनके सीनियर अधिकारी उनकी जान के दुश्मन बने हुए हैं.

इरफान का दावा हैं की भारत-बांग्लादेश सीमा पर अधिकारी तस्करी कराते हैं और जो जवान मुंह खोलने की बात कहता है उसे फर्जी मुठभेड़ में मार दिया जाता है. जब उन्होंने अपने सीनियर अधिकारियों के इस गलत काम का विरोध किया तो उन्हें बंद कमरे में पीटा गया. सिगरेट से भी दागा गया. मजबूरन उन्हें वहां से भागना पड़ा.

उन्होंने बताया कि 15 जनवरी 2016 को 50 बंग्लादेशी भारत आना चाहते थे. सीमा पर इरफान तैनात थे उन्होंने घुसपैठ कराने से इंकार कर दिया.  उन्होंने इस बारें में सारी जानकारी अपने बीएसएफ कमांडर को फोन पर दी. कमांडर ने इरफान को सभी घुसपैठियों को भारत की सीमा में प्रवेश कराने को कहा, इसके बाद इरफान ने घुसपैठियों को भारत आने दिया. इस घटना का जिक्र लागबुक पर कर दिया.

यहीं से इरफ़ान पर मुसीबतें शुरू हुई. उन्हें धमकियां मिलने लगी. इरफान ने इस बारें में कई अधिकारियों से घटना की शिकायत की तो उसे चुप रहने की नसीहत दी गयी. उन्होंने दावा किया कि बीएसएफ के लंगर में बांग्लादेशी घुसपैठी तक काम करते हैं. उन्होंने बताया कि बीएसएफ के लंगर में एक बार उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठी को काम करते हुए देखा था तो उससे पूछा था कि तुम यहां कैसे आये हो. इस पर घुसपैठी ने कहा था कि उसे कमांडर ने रखा है. इरफान ने बताया था कि उसने इसका वीडियो भी बनाया था.


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