देश में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालने और कानून हाथ में लेने की घटनाओं के मुद्दे पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि इन घटनाओं के मद्देनजर हमें देश के बुनियादी सिद्धान्तों की रक्षा के प्रति सजग होना चाहिए.

नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र को फिर से पेश किए जाने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते उन्होने कहा, जब हम अखबारों में पढ़ते हैं या टीवी में देखते हैं कि कानून का पालन या नहीं पालन करने के कारण किसी व्यक्ति की पीट पीट कर हत्या कर दी गई, जब भीड़ का उन्माद बहुत बढ़ जाता है, अनियंत्रित एवं अतार्किक हो जाता है तो हमें थमकर इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या हम पर्याप्त रूप से सजग हैं.

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उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों, बुद्धिजीवियों एवं मीडिया की सजगता ही अंधकार एवं पिछड़ापन की ताकतों के खिलाफ सबसे बड़ा प्रतिरोधक हो सकती है.  उन्होंने कहा, ‘ हम इसे सहन नहीं कर सकते. बुद्धिमत्ता हमसे स्पष्टीकरण मांगेगी कि हम क्या कर रहे थे.

राष्ट्रपति ने मीडियाकर्मियों एवं पत्रकारों से कहा कि उनका काम कभी खत्म नहीं होता। कभी खत्म नहीं हो सकता. उन्होंने, कहा कि क्योंकि आपके कारण लोकतंत्र का अस्तित्व बरकरार है. लोगों के अधिकार संरक्षित हैं. मानवीय गरिमा बरकरार है. गुलामी खत्म हुई है. आपको अपनी सजगता बरकरार रखनी होगी. माफ करें मैं इस शब्द (सजगता) का बार बार इस्तेमाल कर रहा हूं क्योंकि मेरे पास कोई उपयुक्त वैकल्पिक शब्द नहीं है.